Follow Us on Our Social Media
International

ट्रम्प की मदद से ब्राजील छोड़कर अमेरिका पहुंचे फ्लावियो बोल्सोनारो: 72 घंटे में 3 देशों का सफर, इटली के पासपोर्ट पर पत्नी-बेटियों के साथ भागे

 एजेंसी। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद गिरफ्तारी के डर से फ्लावियो बोल्सोनारो परिवार के साथ अमेरिका पहुंच गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भूमिका सामने आई है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने न सिर्फ फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका आने की अनुमति दी, बल्कि उनके लिए प्राइवेट जेट की व्यवस्था करने में भी मदद की। ब्राजील से अमेरिका पहुंचने तक का यह सफर करीब 72 घंटे में तीन देशों से होकर पूरा हुआ।

फ्लावियो अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ पहले ब्राजील से अर्जेंटीना पहुंचे। इसके बाद उनका विमान ईंधन भरने के लिए इक्वाडोर के गुआयाकिल में रुका। वहां से 28 अक्टूबर को वे अमेरिका के मियामी पहुंचे। इस यात्रा के दौरान फ्लावियो ने इटली के पासपोर्ट का इस्तेमाल किया। अमेरिका पहुंचने के बाद उन्होंने खुद को राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार बताया और ट्रम्प के प्रति आभार जताया।

भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में चल रही जांच

फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ ब्राजील में भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी सहित कई मामलों की जांच चल रही है। इनमें उनके पिता के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए रकम जुटाने से जुड़ा मामला भी शामिल है।

फ्लावियो ने स्वीकार किया था कि उन्होंने पूर्व बैंकर डेनियल वोरकारो से फिल्म निर्माण के लिए करीब 1.2 करोड़ डॉलर जुटाने की कोशिश की थी। हालांकि, उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी या गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया है।

इसके अलावा एक ऐसे वकील से उनके संबंधों की भी जांच हो रही है, जिस पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए 1 अरब डॉलर से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। इसी जांच के तहत पुलिस ने फ्लावियो को 24 घंटे के भीतर अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया था। गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने ब्राजील छोड़ने का फैसला किया।

इस पूरी योजना में उनके छोटे भाई एडुआर्डो बोल्सोनारो की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। एडुआर्डो टेक्सास में रहते हैं और उन्हें ट्रम्प प्रशासन के करीबी लोगों में गिना जाता है।

ट्रम्प ने दी अमेरिका आने की मंजूरी, एक साल का मिला परमिट

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 27 अक्टूबर को परिवार को वीजा देने की बात कही थी।

इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने उन्हें एक साल तक अमेरिका में रहने की अनुमति देने वाला ‘ह्यूमैनिटेरियन पैरोल’ भी दिया। यह एक विशेष तरह की अस्थायी अनुमति होती है, जो मानवीय परिस्थितियों या बड़े सार्वजनिक हित के आधार पर दी जाती है। इसके जरिए किसी विदेशी नागरिक को सीमित अवधि तक अमेरिका में रहने की इजाजत मिलती है। हालांकि, यह स्थायी नागरिकता या ग्रीन कार्ड नहीं होता।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, फ्लावियो भविष्य में अमेरिका में स्थायी रूप से रहने के लिए ग्रीन कार्ड का आवेदन कर सकते हैं। उनके छोटे भाई एडुआर्डो को भी जुलाई में ग्रीन कार्ड दिया गया था।

वैन से अर्जेंटीना पहुंचे, 40 मिनट बाद प्राइवेट जेट से निकले

फ्लावियो के ब्राजील से निकलने और अमेरिका पहुंचने की पूरी यात्रा में कई दिलचस्प घटनाक्रम सामने आए हैं।

  • 27 अक्टूबर, रात 10:50 बजे: अर्जेंटीना के इमिग्रेशन विभाग के मुताबिक, फ्लावियो पत्नी और दो बेटियों के साथ सड़क मार्ग से अर्जेंटीना पहुंचे। उन्होंने दक्षिणी ब्राजील के फोज दो इगुआसू से अर्जेंटीना के पुएर्तो इगुआसू शहर को जोड़ने वाले फ्रेटरनिटी ब्रिज से सीमा पार की।
  • सीमा पार करने के बाद: करीब 40 मिनट बाद फ्लावियो और उनका परिवार प्राइवेट जेट से आगे के सफर पर निकल गया।
  • इक्वाडोर में ठहराव: विमान ईंधन भरने के लिए इक्वाडोर के गुआयाकिल में रुका।
  • 28 अक्टूबर: फ्लावियो परिवार के साथ अमेरिका के मियामी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने इटली के पासपोर्ट का इस्तेमाल किया।

इस यात्रा को लेकर ब्राजील और अर्जेंटीना के अधिकारियों के बयानों में भी अंतर सामने आया। ब्राजील की पुलिस के मुताबिक, उनके देश छोड़ने का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। अर्जेंटीना की पुलिस ने भी प्रवेश का रिकॉर्ड होने से इनकार किया। हालांकि, अर्जेंटीना के इमिग्रेशन विभाग ने उनके देश पहुंचने की पुष्टि की है।

ट्रम्प पहले ही कर चुके थे स्वागत का ऐलान

फ्लावियो के अमेरिका पहुंचने से एक दिन पहले 27 अक्टूबर को ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर बोल्सोनारो अमेरिका आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। ट्रम्प ने उन्हें अच्छा इंसान बताया था। उन्होंने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव को अजीब और बेहद खराब भी करार दिया था।

ट्रम्प इससे पहले भी ब्राजील के चुनाव परिणामों पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे, हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं रखा गया। फ्लावियो ने भी अपने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करने का वादा किया था। वहीं, ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने ट्रम्प पर ब्राजील के चुनाव में दखल देने का आरोप लगाया है।

अमेरिका पहुंचकर खुद को ब्राजील का वैध राष्ट्रपति बताया

मियामी पहुंचने के बाद फ्लावियो ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। इसमें उन्होंने खुद को ब्राजील का वैध राष्ट्रपति बताया था। हालांकि, बाद में यह बयान हटा दिया गया और संशोधित बयान में उन्होंने खुद को ब्राजील का नेता बताया।

उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक उत्पीड़न के कारण उन्हें देश छोड़ना पड़ा। साथ ही ट्रम्प और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति का आभार जताया। फ्लावियो ने ब्राजील के चुनाव में धांधली का आरोप भी लगाया और वहां की न्यायपालिका पर उन्हें निशाना बनाने का दावा किया। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया।

चुनाव में लूला से 44 लाख वोटों से हारे थे फ्लावियो

25 अक्टूबर को हुए ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो को मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने करीब 44 लाख वोटों से हराया था। दूसरे दौर की मतगणना में लूला को 52 प्रतिशत और फ्लावियो को 48 प्रतिशत वोट मिले।

पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत वोट नहीं मिले थे, जिसके बाद चुनाव दूसरे दौर में पहुंचा। हार के बाद फ्लावियो ने चुनाव परिणामों को स्वीकार नहीं किया और धांधली के आरोप लगाए।

अब उनका अमेरिका पहुंचना ब्राजील की राजनीति और ट्रम्प प्रशासन के साथ संबंधों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ फ्लावियो इसे राजनीतिक उत्पीड़न से बचने का कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ चल रही जांच और देश छोड़ने के घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Follow Us on Our Social Media

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button