धमतरी का प्राचीन नाग मंदिर: नाग पंचमी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 11वीं सदी की प्रतिमा बनी आस्था का केंद्र

धमतरी। सनातन परंपरा में नागों को केवल जीव नहीं, बल्कि देवत्व और शक्ति का प्रतीक माना गया है। भगवान विष्णु का शेषनाग पर शयन और भगवान शिव के गले में नागराज वासुकी का विराजमान होना नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है। इसी आस्था से जुड़ा धमतरी शहर के हटकेश्वर वार्ड स्थित प्राचीन नाग मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक केंद्र बना हुआ है।
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महाभारत काल से जुड़ी है नाग पंचमी की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी का संबंध महाभारत काल की एक महत्वपूर्ण कथा से है। राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने डस लिया था, जिसके बाद उनके पुत्र जनमेजय ने नाग जाति के विनाश के लिए सर्प सत्र यज्ञ शुरू किया।
यज्ञ के प्रभाव से बड़ी संख्या में नाग यज्ञ कुंड में गिरने लगे। तक्षक नाग अपनी रक्षा के लिए देवराज इंद्र के सिंहासन से लिपट गया, लेकिन यज्ञ के प्रभाव से इंद्र का सिंहासन भी यज्ञ कुंड की ओर खिंचने लगा।
इसके बाद आस्तिक मुनि ने जनमेजय से यज्ञ रोकने का आग्रह किया। उनकी बात मानकर जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया और नागों को अभयदान दिया। मान्यता है कि जिस दिन यह यज्ञ रुका, वह श्रावण शुक्ल पंचमी थी। इसी वजह से नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की परंपरा शुरू हुई।
धमतरी का प्राचीन नाग धाम
धमतरी के हटकेश्वर वार्ड में स्थित इस प्राचीन नाग मंदिर को करीब 11वीं शताब्दी पुराना बताया जाता है। मंदिर में स्थापित प्राचीन नाग प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
नाग पंचमी के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। धमतरी के अलावा छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों से भी श्रद्धालु यहां नाग देवता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों में इस मंदिर को लेकर गहरी आस्था है। मान्यता है कि नाग देवता इस क्षेत्र की रक्षा करते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि मंदिर के आसपास सर्पदंश से अब तक किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। हालांकि, यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है, जिसका स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
नाग पंचमी पर दर्शन की खास मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन इस मंदिर में नाग देवता के विशेष दर्शन होते हैं। श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की सुरक्षा की कामना करते हैं।
कई भक्तों का मानना है कि मंदिर में पूजा करने से सर्प भय और मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। इसी आस्था के चलते नाग पंचमी के अलावा पूरे साल मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।
धमतरी का यह नाग मंदिर धार्मिक आस्था, प्राचीन परंपरा और स्थानीय संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। नाग पंचमी के अवसर पर यहां जुटने वाली भीड़ इस मंदिर से लोगों के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।



