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भारत-यूके व्यापार समझौता आज से लागू: व्हिस्की होगी सस्ती, भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा बाजार

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके तहत ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर शुल्क में कमी आएगी, जबकि भारतीय निर्यातकों को यूके के बाजार में लगभग शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।

समझौते के तहत भारत के करीब 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को यूके में शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, खिलौने, खेल सामग्री, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो पार्ट्स और ऑर्गेनिक केमिकल जैसे क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा मिलने की संभावना है। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, भारत ब्रिटेन के लगभग 90 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी करेगा। इसके चलते स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स और अन्य कई ब्रिटिश उत्पाद भारतीय बाजार में पहले की तुलना में सस्ते हो जाएंगे। स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क शुरुआती चरण में 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा, जिसे अगले 10 वर्षों में 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। वहीं, ब्रिटिश ऑटोमोबाइल पर भी तय कोटा प्रणाली के तहत शुल्क में क्रमिक कमी की जाएगी।

इस व्यापार समझौते में केवल वस्तुओं का व्यापार ही नहीं, बल्कि डिजिटल ट्रेड, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा, नवाचार, लघु एवं मध्यम उद्योग, सरकारी खरीद और पारदर्शिता जैसे 30 से अधिक महत्वपूर्ण अध्याय शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ लागू होने से यूके में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा अंशदान में भी राहत मिलेगी, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत और यूके के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार बढ़कर 25.13 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस मुक्त व्यापार समझौते से आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में लगभग 25.5 बिलियन पाउंड तक की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।

हालांकि, भारत ने डेयरी उत्पाद, सेब, चीज, चीनी, चावल, पोर्क, चिकन और अंडे जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते में विशेष सुरक्षा प्रदान की है, ताकि घरेलू किसानों और कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। वहीं, स्टील निर्यातकों को यूके की कोटा व्यवस्था और 2027 से लागू होने वाले कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) से जुड़े नियमों का भी पालन करना होगा।

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