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रायपुर के राशन दुकान में सरकारी चावल की हेराफेरी,

लाखों रुपये की गड़बड़ी, संचालक पर FIR दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित राशन दुकानों में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य विभाग की शिकायत पर पुलिस ने एक उचित मूल्य दुकान के संचालक और विक्रेता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जांच में लाखों रुपये मूल्य के सरकारी चावल की हेराफेरी का खुलासा हुआ है।

जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी

जानकारी के मुताबिक जोरा स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी क्रमांक 442001026) में स्टॉक की जांच के दौरान भारी अनियमितता पाई गई। यह दुकान महामाया खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति मर्यादित द्वारा संचालित की जा रही थी। जांच अधिकारियों को रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर मिला।

खाद्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार समिति के अध्यक्ष एवं विक्रेता टोपेश्वर साहू द्वारा करीब 389.24 क्विंटल चावल का गबन किया गया है। इसकी बाजार कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।

नोटिस के बाद दर्ज हुई एफआईआर

खाद्य विभाग ने मामले में संबंधित संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हालांकि निर्धारित समय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद विभाग ने मामले की शिकायत तेलीबांधा थाना में दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने टोपेश्वर साहू के खिलाफ धोखाधड़ी और शासकीय राशन की हेराफेरी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सरकारी अनाज को कहां और किस माध्यम से खपाया गया।

पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें

रायपुर में इन दिनों हितग्राहियों को तीन माह का राशन एकमुश्त वितरित किया जा रहा है। इस बीच कई राशन दुकानों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि लाभार्थियों को अनाज देने के बजाय नकद राशि लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दुकानदार राशन नहीं होने का बहाना बनाकर चावल के बदले पैसे देने की पेशकश करते हैं। जबकि सरकारी नियमों के अनुसार पात्र हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

मशीन में लोहे का बाट रखकर खेल!

सूत्रों के मुताबिक कुछ राशन दुकानों में धांधली का नया तरीका अपनाया जा रहा है। चावल वितरण की ऑनलाइन एंट्री के दौरान मशीन पर लोहे का बाट रखकर वजन दर्ज कर दिया जाता है। इससे सिस्टम में राशन वितरण दिख जाता है, जबकि वास्तविक अनाज हितग्राहियों तक नहीं पहुंचता।

इसके बाद दुकानदार कम कीमत पर नकद राशि देकर सरकारी चावल को खुले बाजार में बेच देते हैं। बताया जा रहा है कि इस तरीके से प्रति किलो 5 से 10 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई की जाती है।

गरीबों के हक पर डाका

सरकार गरीब परिवारों को सस्ती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए पीडीएस व्यवस्था संचालित करती है। ऐसे में राशन दुकानों में सामने आ रही गड़बड़ियां सीधे तौर पर जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों पर चोट मानी जा रही हैं।

फिलहाल पुलिस और खाद्य विभाग मामले की जांच में जुटे हैं। जांच पूरी होने के बाद इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

 

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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