झोलाछाप डॉक्टर ने 3 साल के मासूम को लगाया इंजेक्शन, 10 मिनट बाद मौत;
पिता ने लगाया लापरवाही का आरोप

बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। कोतवाली थाना क्षेत्र में बुखार से तप रहे 3 साल के मासूम की इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनट बाद मौत हो गई। मृत बच्चे के पिता ने एक कथित झोलाछाप डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाने और इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
इंजेक्शन लगने के 10 मिनट बाद बिगड़ी तबीयत, रास्ते में मासूम की मौत
जानकारी के मुताबिक, बलरामपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम जमुआटांड़ निवासी रमेश चेरवा का 3 वर्षीय बेटा अभीस चेरवा बुखार से पीड़ित था। बुधवार शाम करीब 6 बजे बच्चे की तबीयत खराब होने पर पिता उसे ग्राम सरनाडीह निवासी भुलेश्वर सिंह के पास लेकर पहुंचे।
परिजन का आरोप है कि भुलेश्वर सिंह बिना पंजीकृत चिकित्सक के तौर पर घर पर ही लोगों का इलाज करता है। बच्चे को भी उसने घर पर ही इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के बाद पिता बच्चे को लेकर वापस घर के लिए रवाना हो गए।
लेकिन रास्ते में ही बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई। पिता के मुताबिक, इंजेक्शन लगने के करीब 5 से 10 मिनट बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। घर पहुंचने से पहले ही मासूम की मौत हो गई।
पिता ने लगाया गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप
मृत बच्चे के पिता रमेश चेरवा ने पुलिस को दी शिकायत में कथित डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बच्चे को सिर्फ बुखार था और इसी वजह से वे उसे इलाज के लिए भुलेश्वर सिंह के पास लेकर गए थे।
पिता के अनुसार, डॉक्टर ने बच्चे को इंजेक्शन लगाया और इसके कुछ ही देर बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। परिवार बच्चे को लेकर घर लौट रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
हालांकि, बच्चे की मौत वास्तव में किस वजह से हुई और इंजेक्शन का इससे कोई सीधा संबंध था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने शुरू की जांच, पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने कोतवाली पुलिस को मामले की शिकायत दी। पुलिस ने गुरुवार को बच्चे के शव का पोस्टमॉर्टम कराया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
कोतवाली प्रभारी के अनुसार, पुलिस को शिकायत मिली है कि एक बिना पंजीकृत व्यक्ति द्वारा बच्चे का इलाज किया गया और इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस पूरे मामले की विवेचना कर रही है।
अब जांच में यह देखा जाएगा कि बच्चे को कौन सा इंजेक्शन लगाया गया था, उसकी स्थिति कितनी गंभीर थी, इलाज करने वाले व्यक्ति के पास चिकित्सा संबंधी कोई वैध योग्यता या पंजीयन था या नहीं और बच्चे की मौत का वास्तविक कारण क्या था।
इलाज के नाम पर झोलाछापों का बढ़ता खतरा
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सक्रिय कथित झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बलरामपुर समेत सरगुजा संभाग के कई ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे लोग इलाज करते नजर आते हैं। कई बार ग्रामीण मजबूरी, दूरी या तत्काल इलाज की जरूरत के चलते अस्पताल की जगह ऐसे लोगों के पास पहुंच जाते हैं।
सबसे बड़ी चिंता तब होती है, जब बिना पर्याप्त मेडिकल योग्यता के किसी व्यक्ति द्वारा मरीज को इंजेक्शन या गंभीर दवाएं दे दी जाती हैं। किसी भी इंजेक्शन के बाद मरीज में एलर्जी या दूसरी गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है। ऐसे मामलों में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा जरूरी होती है।
मासूम की मौत के बाद बड़ा सवाल—कौन कर रहा था इलाज?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिना पंजीकृत डॉक्टर के रूप में इलाज करने वाले व्यक्ति के पास मरीजों को इंजेक्शन देने की अनुमति और जरूरी चिकित्सा योग्यता थी या नहीं?
अगर जांच में इलाज करने वाले व्यक्ति की लापरवाही या अवैध चिकित्सा प्रैक्टिस सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पुलिस की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़
तीन साल के मासूम की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। जिस बच्चे को बुखार के इलाज के लिए लेकर गए थे, कुछ ही देर बाद उसकी मौत की खबर ने परिवार को झकझोर दिया।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। बच्चे की मौत के पीछे असली वजह क्या थी, यह जांच पूरी होने और मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जरूरी सावधानी
बच्चे या किसी भी मरीज को बुखार होने पर बिना योग्य चिकित्सक की सलाह के इंजेक्शन या कोई तेज दवा नहीं देनी चाहिए। अगर मरीज की हालत बिगड़ रही हो तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या पंजीकृत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। किसी व्यक्ति के पास सिर्फ इलाज का अनुभव होने का दावा होना, उसे इंजेक्शन लगाने या इलाज करने के लिए अधिकृत नहीं बनाता।



