झीरम घाटी जजमेंट में साजिश का पूरा प्लान: 25 फरवरी से हमले तक की तैयारी, 101 गवाहों और 207 दस्तावेजों से सामने आई कहानी

जगदलपुर। झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद अब जजमेंट कॉपी में हमले की साजिश और नक्सलियों की तैयारियों से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए हमले में 29 लोगों की मौत हुई थी। 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई।
25 फरवरी को रची गई थी हमले की साजिश
जजमेंट के मुताबिक, 25 फरवरी 2013 को साउथ रीजनल यूनिफाइड कमांड की बैठक में झीरम घाटी में बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना पर फैसला लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, बारसे देवा और सुरेंद्र ने TCOC के दौरान दरभा डिवीजन में बड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा था।
जजमेंट में कहा गया है कि देवजी और गणेश उइके ने नक्सली कमांडर जयलाल को CRC कंपनी-2 की टुकड़ी के साथ दरभा डिवीजन भेजा था। देवजी, गणेश उइके, बारसे देवा और सुरेंद्र को एंबुश की जगह चुनने की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि सामान जुटाने का काम श्याम और सुरेंद्र को सौंपा गया था।
जजमेंट के मुताबिक, इस कार्रवाई को नक्सली नेताओं गणपति और रमन्ना की मंजूरी मिली थी।
150 से ज्यादा नक्सलियों के शामिल होने का उल्लेख
अदालत के फैसले में कहा गया है कि हमले की साजिश और उसे अंजाम देने में सुरेंद्र, बारसे देवा, जयलाल, विनोद और सोनाधार समेत 150 से ज्यादा नक्सली शामिल थे।
हमले के दिन प्रमिला, बंजामी सन्ना, आयता मरकाम, मुक्का माड़वी, मड़कामी देवा, चैतू लेकाम, कवासी कोसा, महादेव नाग, जोगा मड़कामी और सुमित्रा समेत अन्य आरोपी भी मौके पर मौजूद थे। इनमें कवासी कोसा की मृत्यु हो चुकी है।
आरोपियों के बयानों में फायरिंग और हथियार लूटने का जिक्र
जजमेंट में आरोपियों के बयानों का भी उल्लेख किया गया है। अभियोजन के मुताबिक, चैतू लेकाम ने अपने बयान में बताया कि घटना के दिन उसने और प्रमिला ने काफिले पर गोलीबारी की थी। चैतू ने अपनी इंसास राइफल से 10 राउंड फायर करने की बात कही।
जजमेंट में यह भी उल्लेख है कि प्रमिला, बंजामी सन्ना और महादेव नाग ने घटना के दौरान सुरक्षा बलों के हथियार लूटे। अन्य आरोपियों पर घटना से पहले नक्सली बैठकों में शामिल होने, राशन-सामान पहुंचाने और हमले के बाद हथियार लूटने में भूमिका निभाने के आरोपों का उल्लेख किया गया है।
22 हथियार लूटे गए थे
25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के 22 हथियार लूटे थे, जिनमें AK-47, इंसास, SLR और एमएम पिस्टल शामिल थे।
जजमेंट में नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा को बंधक बनाए जाने का भी उल्लेख है।
101 गवाहों के बयान, 207 दस्तावेज पेश
इस मामले की लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। जजमेंट में 207 साक्ष्य दस्तावेज पेश किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी 101 गवाहों की गवाही की पुष्टि होती है।
NIA ने मामले में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की थी।
27 फरार आरोपियों पर फैसला बाकी
मामले में कुल 39 लोगों को आरोपी बनाए जाने की बात जजमेंट में सामने आई है। इनमें से 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही और इन्हीं 10 को दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई गई।
अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही अलग से लंबित है। उपलब्ध रिपोर्टों में फरार आरोपियों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं, इसलिए इस संख्या को अंतिम मानने से पहले जजमेंट के मूल रिकॉर्ड से मिलान जरूरी है।
26/11 मुंबई हमले की नजीर का भी जिक्र
एनआईए कोर्ट ने सजा सुनाते समय 26/11 मुंबई आतंकी हमले का भी संदर्भ दिया। जजमेंट में साजिश और हमले में आरोपियों की भूमिका की तुलना करते हुए अपराध की गंभीरता पर विचार किया गया।
अदालत ने मामले को गंभीर श्रेणी का अपराध मानते हुए 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। हालांकि, यह सजा अभी अंतिम रूप से निष्पादित नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट को मृत्युदंड की पुष्टि करनी होगी और दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
13 साल पुराने झीरम घाटी मामले में 16 सितंबर को आया यह फैसला अब हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में जाएगा।



