MAUSAM: 2026 का एल नीनो मचा सकता है तबाही, रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का खतरा

दिल्ली। 2026 में तेजी से मजबूत हो रहा एल नीनो दुनिया के मौसम (MAUSAM) के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अमेरिका के NOAA के जुलाई के आकलन के मुताबिक एल नीनो पहले ही सक्रिय है और साल के अंत तक इसके और मजबूत होने की संभावना है। NOAA के अनुसार, इसके 2027 की शुरुआत तक बने रहने की भी 97% संभावना है।
NOAA की GFDL प्रयोगात्मक भविष्यवाणी में भी इस एल नीनो के बेहद मजबूत होने के संकेत मिले हैं। मॉडल के सभी 30 एन्सेंबल सदस्यों में इसकी अधिकतम तीव्रता पिछली सदी की सबसे मजबूत घटनाओं के बराबर या उससे अधिक रहने का अनुमान है। इसके शरद ऋतु से बढ़ने और नवंबर-दिसंबर के आसपास चरम पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
बढ़ते तापमान से मौसम में बदलाव का खतरा
एल नीनो के मजबूत होने से दुनिया के कई हिस्सों में तापमान (MAUSAM) बढ़ने और बारिश के पैटर्न में बदलाव की आशंका रहती है। इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है। कहीं हीटवेव और सूखे का खतरा बढ़ सकता है तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।
भारत के मानसून पर भी चिंता
भारत के लिए एल नीनो इसलिए अहम है क्योंकि यह मानसून (MAUSAM) की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। IMD ने मई में 2026 के पूरे मानसून सीजन में देशभर में बारिश LPA की 90% रहने का अनुमान लगाया था, यानी सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई थी। मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के लिए भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान था।
इसका सीधा असर खेती पर पड़ सकता है। मानसून कमजोर रहने पर खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होने के साथ धान, सोयाबीन और अन्य फसलों की पैदावार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक एल नीनो का असर हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता और स्थानीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

