लंदन में मोहन भागवत ने ऐतिहासिक गुरुद्वारे में टेका मत्था, सिख समुदाय से की मुलाकात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने ब्रिटेन दौरे के दौरान लंदन के ऐतिहासिक खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा साहिब का दौरा किया। उन्होंने यहां सिख समुदाय के लोगों से संवाद किया और धार्मिक परंपराओं के अनुसार गुरुद्वारे में मत्था टेका। यह गुरुद्वारा 1908 में स्थापित किया गया था और इसे यूरोप के शुरुआती गुरुद्वारों में से एक माना जाता है।
भागवत अमेरिका और कनाडा के बाद अपने विदेश दौरे के अंतिम चरण में ब्रिटेन पहुंचे हैं। उनके दौरे का उद्देश्य भारतीय समुदाय और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक समूहों के साथ संवाद बढ़ाना भी बताया गया है।
गुरुद्वारे में रुमाला साहिब भेंट किया
लंदन के विल्सडेन स्थित गुरुद्वारे में मोहन भागवत ने रुमाला साहिब भेंट किया और कड़ा प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ बातचीत भी की। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी के मुताबिक, गुरु दरबार में श्रद्धालुओं का स्वागत विनम्रता के साथ प्रार्थना करने और आशीर्वाद लेने की भावना से किया जाता है।
भागवत ने लंदन के विल्सडेन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर का भी दौरा किया। वहां जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा था। बाद में उन्होंने एक कम्युनिटी सेंटर में ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ थीम पर आयोजित जनसभा को संबोधित किया।
1908 में स्थापित हुआ था खालसा जत्था
खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स की स्थापना 1908 में लंदन में हुई थी। उस दौर में ब्रिटेन में बसे सिख प्रवासियों के लिए यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र बना। इसे यूरोप में स्थापित शुरुआती गुरुद्वारों में प्रमुख माना जाता है।
भागवत ने अपने ब्रिटेन दौरे के दौरान भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए विविधता और एकता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं है। उनके मुताबिक हिंदू राष्ट्र की अवधारणा धर्म, पूजा-पद्धति या जीवनशैली के बजाय विविधता को स्वीकार करने पर आधारित है।
RSS के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है दौरा
मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। इससे पहले वह न्यूयॉर्क और टोरंटो में भी भारतीय समुदाय और अन्य लोगों के साथ कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं।
इस अभियान के जरिए विदेशों में भारतीय समुदाय के साथ संपर्क बढ़ाने और संघ के विचारों व गतिविधियों को लेकर संवाद स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। लंदन में गुरुद्वारे और मंदिर के दौरे को भी इसी व्यापक संपर्क कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।



