धर्मांतरण पर छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम
महिला-बच्चों से जुड़े मामलों में बढ़ेगी सजा की अवधि

रायपुर | छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर अब कानून और सख्त हो गया है। छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 10 जुलाई से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है। नए कानून के लागू होने के बाद गलत तरीके, दबाव, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इस कानून के जरिए जबरन या अवैध धर्मांतरण(Religious conversion) के मामलों पर रोक लगाने का प्रयास किया है।
नए अधिनियम में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में सजा और जुर्माने के प्रावधान पहले से अधिक सख्त किए गए हैं। कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बल, लालच या छल-कपट के जरिए किसी का धर्मांतरण(Religious conversion) कराता है तो दोषी पाए जाने पर उसे कई वर्षों की सजा के साथ आर्थिक दंड भी भुगतना पड़ सकता है। वहीं महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में सजा का प्रावधान और बढ़ाया गया है।
धर्म परिवर्तन से पहले देनी होगी 60 दिन पहले सूचना
नए कानून के तहत अब धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को भी निर्धारित नियमों के दायरे में लाया गया है। धर्मांतरण(Religious conversion) करने वाले व्यक्ति को पहले से जिला कलेक्टर को इसकी जानकारी देनी होगी। अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होगा, ताकि प्रशासन मामले की जांच कर सके। इसके अलावा केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की गई शादी को अमान्य घोषित करने का प्रावधान भी कानून में शामिल किया गया है।
विशेष अदालतों में होगी सुनवाई, तय समय में पूरा करना होगा मामला
धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 के तहत ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए जिलों में विशेष अदालतें गठित करने का प्रावधान किया गया है। कानून के मुताबिक मामलों की सुनवाई निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करने की व्यवस्था की जाएगी। सामूहिक धर्मांतरण जैसे गंभीर मामलों में और भी कड़े प्रावधान रखे गए हैं, जिसमें लंबी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान शामिल है।
नए कानून के लागू होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी बढ़ने की संभावना है। सरकार का कहना है कि इस अधिनियम का उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित करना नहीं, बल्कि दबाव, धोखे या प्रलोभन के जरिए होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। वहीं कानून के प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।

