NEET PG का बदला टाइमटेबल अब भी नहीं सुधरा,
मेडिकल कॉलेजों में बढ़ रही पीजी छात्रों की कमी

रायपुर। कोरोना महामारी के दौरान प्रभावित हुआ NEET PG परीक्षा का शेड्यूल अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। पहले यह परीक्षा हर साल जनवरी से मार्च के बीच आयोजित होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसका आयोजन लगातार देरी से हो रहा है। इस साल भी NEET PG परीक्षा 30 अगस्त को प्रस्तावित है। परीक्षा में हो रही देरी का सीधा असर मेडिकल कॉलेजों में पीजी छात्रों के प्रवेश और अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
कोरोना काल के बाद नहीं पटरी पर लौटा परीक्षा कैलेंडर
मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान परीक्षा कार्यक्रम में हुए बदलावों का असर आज भी देखने को मिल रहा है। परीक्षा और काउंसलिंग में देरी के कारण नए पीजी छात्रों की एंट्री समय पर नहीं हो पा रही है। इससे मेडिकल कॉलेजों में सीटें लंबे समय तक खाली रहती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है।
सीनियर डॉक्टरों पर बढ़ रहा काम का दबाव
सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों की देखभाल का बड़ा हिस्सा पीजी छात्र और जूनियर डॉक्टर संभालते हैं। नए बैच के समय पर नहीं आने से सीनियर रेजिडेंट और मौजूदा डॉक्टरों पर अतिरिक्त काम का बोझ पड़ रहा है। कई विभागों में सीमित स्टाफ के सहारे काम चलाना पड़ रहा है, जिससे चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
पिछले दो वर्षों का शेड्यूल
- पिछले वर्ष NEET PG परीक्षा 15 जून को प्रस्तावित थी।
- बाद में परीक्षा 3 अगस्त को आयोजित की गई।
- इस वर्ष परीक्षा 30 अगस्त को प्रस्तावित है।
- काउंसलिंग नवंबर-दिसंबर में शुरू होने की संभावना है।
- नए पीजी बैच की एंट्री अगले वर्ष की शुरुआत तक खिंच सकती है।
नेहरू मेडिकल कॉलेज समेत कई संस्थानों पर असर
राजधानी रायपुर के नेहरू मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी इस देरी का असर देखने को मिल सकता है। मेडिकल कॉलेजों में पीजी छात्रों की कमी पहले से ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई विभागों में पर्याप्त संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे शिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों पर असर पड़ता है।
मरीजों की सेवाओं पर भी पड़ सकता है प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मेडिकल शिक्षा का मुद्दा नहीं है। अस्पतालों में ओपीडी, इमरजेंसी और वार्ड सेवाओं में पीजी छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में नए छात्रों की एंट्री में देरी का असर मरीजों की देखभाल और इलाज व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि NEET PG परीक्षा और काउंसलिंग प्रक्रिया को फिर से पुराने शेड्यूल पर लाने की जरूरत है। उनका मानना है कि समय पर परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने से मेडिकल कॉलेजों में नियमित अकादमिक सत्र संचालित हो सकेंगे और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की समस्या भी कम होगी।
आगे क्या?
फिलहाल 30 अगस्त को परीक्षा प्रस्तावित है और काउंसलिंग वर्ष के अंत में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को अभी कुछ और महीनों तक पीजी छात्रों की कमी की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि NEET PG का शेड्यूल कब पूरी तरह सामान्य होता है और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था फिर से अपने पुराने कैलेंडर पर लौट पाती है या नहीं।

