
दिल्ली। वेदांता लिमिटेड के प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। स्टॉक एक्सचेंज में दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी (Vedanta) के प्रमोटर समूह की करीब 54.72% हिस्सेदारी पर ‘एनकम्ब्रेंस’ (Encumbrance) दर्ज किया गया है।
यह कदम वेदांता रिसोर्सेज की ओर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1.75 अरब डॉलर के सीनियर बॉन्ड जारी करने के बाद उठाया गया है।
एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, GLAS Agency (Hong Kong) Limited ने बॉन्ड होल्डर्स की ओर से सिक्योरिटी ट्रस्टी के रूप में यह जानकारी साझा की है।
वेदांता रिसोर्सेज फाइनेंस (Vedanta) II Plc ने तीन अलग-अलग चरणों में बॉन्ड जारी किए हैं, जिनकी सुरक्षा के तहत प्रमोटर समूह के शेयरों पर संविदात्मक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
कंपनी ने 500 मिलियन डॉलर के 7% ब्याज वाले 2032 मैच्योरिटी बॉन्ड, 700 मिलियन डॉलर के 7.375% ब्याज वाले 2034 बॉन्ड और 550 मिलियन डॉलर के 7.75% ब्याज वाले 2037 बॉन्ड जारी किए हैं। इन बॉन्ड्स के बदले प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी पर विशेष शर्तें लागू की गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्विन स्टार होल्डिंग्स, वेल्टर ट्रेडिंग और वेदांता होल्डिंग्स मॉरीशस-II के पास मौजूद 2.13 अरब से अधिक शेयर इस व्यवस्था के दायरे में आए हैं।
हालांकि, कंपनी (Vedanta) ने स्पष्ट किया है कि इन शेयरों को पारंपरिक अर्थों में गिरवी (Pledge) नहीं रखा गया है, बल्कि बॉन्ड समझौते के तहत इन पर कुछ अनुबंधित प्रतिबंध लगाए गए हैं।
बॉन्ड की प्रमुख शर्तों के मुताबिक, वेदांता रिसोर्सेज को वेदांता लिमिटेड में कम से कम 50.1% हिस्सेदारी और नियंत्रण बनाए रखना होगा। किसी भी डिफॉल्ट की स्थिति में प्रमोटर समूह अपनी हिस्सेदारी या संपत्तियों का निपटान केवल तय शर्तों के अनुसार ही कर सकेगा।
यह खुलासा सेबी के टेकओवर रेगुलेशन, 2011 के तहत किया गया है। अब निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि इस घटनाक्रम का वेदांता के शेयरों और निवेशकों की धारणा पर क्या असर पड़ता है।

