राहुल गांधी के OSD वाले बयान से चर्चा में आया पद, जानिए क्या होता है OSD और कितने होते हैं इसके अधिकार

नई दिल्ली। लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) को लेकर दिए गए बयान के बाद यह पद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि शिक्षा मंत्रालय की नीतियां मंत्री नहीं, बल्कि OSD के जरिए तय होती हैं। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और इसे निराधार बताया।
क्या होता है OSD?
OSD (Officer on Special Duty) केंद्र या राज्य सरकार, मंत्री या मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्त ऐसा अधिकारी होता है, जिसे किसी विशेष कार्य, नीति या जिम्मेदारी के लिए तैनात किया जाता है। यह कोई स्थायी कैडर पद नहीं होता, बल्कि आवश्यकता के अनुसार बनाया जाने वाला अस्थायी पद होता है।
OSD की नियुक्ति कैसे होती है?
OSD के लिए कोई सीधी भर्ती परीक्षा नहीं होती। आमतौर पर इसकी नियुक्ति तीन तरीकों से होती है—
- IAS, IPS, IRS या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) पर भेजा जाता है।
- मंत्री या मुख्यमंत्री के भरोसेमंद व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है।
- नियुक्ति औपचारिक आदेश के जरिए होती है और अधिकांश मामलों में कार्यकाल संबंधित मंत्री के कार्यकाल तक ही सीमित रहता है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों के अनुसार, मंत्री कार्यालय में डिप्टी सेक्रेटरी स्तर और उससे ऊपर के OSD की नियुक्ति के लिए नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी आवश्यक होती है।
OSD के अधिकार क्या हैं?
OSD का मुख्य काम मंत्री को नीतिगत सलाह देना, विभागों के बीच समन्वय बनाना, महत्वपूर्ण फाइलों और योजनाओं पर इनपुट देना तथा रणनीतिक मामलों में सहयोग करना होता है। हालांकि, किसी मंत्रालय के अंतिम निर्णय लेने या सरकारी आदेश जारी करने का संवैधानिक अधिकार OSD के पास नहीं होता। यह अधिकार संबंधित मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के पास ही रहता है।
OSD, PS और PA में अंतर
- PA (पर्सनल असिस्टेंट): मंत्री का दैनिक कार्यालय, बैठकें और शेड्यूल संभालता है।
- PS (प्राइवेट सेक्रेटरी): कार्यालय का प्रशासनिक प्रबंधन और विभागीय समन्वय देखता है।
- OSD: नीतिगत सलाह, रणनीतिक योजना और विशेष जिम्मेदारियों पर काम करता है, इसलिए इसे अपेक्षाकृत अधिक प्रभावशाली पद माना जाता है।
राहुल गांधी के बयान पर विवाद
राहुल गांधी ने दावा किया कि मंत्रालय की वास्तविक नीतियां OSD के जरिए संचालित होती हैं, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी मंत्रालय की अंतिम जिम्मेदारी और निर्णय लेने का अधिकार संबंधित मंत्री के पास ही होता है। सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए उनसे सबूत और माफी की मांग की।

