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राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी बोले- इस्तीफा नहीं दूंगा, चंपत राय की लापरवाही से हुई घटना

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने मीडिया में चल रही अपने इस्तीफे की खबरों का खंडन करते हुए स्पष्ट कहा कि वह पद नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में हुई कथित चोरी की घटना बेहद दुखद और शर्मनाक है, लेकिन वह इस्तीफा देने के बजाय व्यवस्था को और मजबूत करने का काम करेंगे।

गोविंद देव गिरी ने प्रेस वार्ता में कहा कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज के अनुयायी हैं और जिम्मेदारी से भागने वालों में नहीं हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि यह घटना ट्रस्ट के लिए बड़ा झटका है और लोगों का विश्वास दोबारा जीतना उनकी प्राथमिकता है।

‘चंपत राय की लापरवाही से हुई घटना’

कोषाध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले में चंपत राय की लापरवाही सामने आई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कोषाध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी ट्रस्ट के आय-व्यय और लेखा-जोखा तक सीमित थी। दान की राशि एकत्र करने की व्यवस्था स्थानीय ट्रस्टियों और नियुक्त कर्मचारियों के जिम्मे थी।

‘रोज कर रहा हूं प्रायश्चित’

गोविंद देव गिरी ने कहा कि इस घटना के बाद वह रोज प्रायश्चित कर रहे हैं और अपने जप की संख्या भी बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि मंदिर में 70 पंडितों द्वारा 10 दिनों का विशेष अनुष्ठान भी कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक श्रद्धालुओं का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं हो जाता, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे।

एसआईटी जांच पर जताया भरोसा

उन्होंने कहा कि कथित चोरी मामले में चल रही एसआईटी जांच और सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया पर उन्हें पूरा भरोसा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट अंतिम सत्य नहीं होती और उसके निष्कर्षों को सबूतों के आधार पर साबित करना होगा।

चोरी की रकम पर क्या बोले?

गोविंद देव गिरी ने कहा कि चोरी की रकम को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। उनकी जानकारी के अनुसार कथित गबन की राशि करीब 3 करोड़ रुपये हो सकती है। इससे अधिक बताए जा रहे आंकड़ों को उन्होंने गलत बताया।

ट्रस्ट ने बढ़ाए सुरक्षा इंतजाम

कोषाध्यक्ष ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दान की गिनती के दौरान ड्रेस कोड लागू किया गया है, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और मजबूत की गई है तथा बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की तलाशी अनिवार्य कर दी गई है। नकदी गिनने की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले का किसी राजनीतिक दल या संगठन से कोई संबंध नहीं है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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