शक्तिपीठ महामार्ग का बदला रूट, अब सातारा के 19 गांवों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना में बड़ा बदलाव किया गया है। किसानों के लगातार विरोध और भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए आंदोलनों के बाद सरकार ने एक्सप्रेसवे का रूट बदल दिया है। नई अधिसूचना के मुताबिक अब यह महामार्ग सातारा जिले के 19 गांवों से होकर गुजरेगा। रूट बदलने के कारण परियोजना की लंबाई भी 54 किलोमीटर बढ़कर 856 किलोमीटर हो गई है।
किसानों के विरोध के बाद बदला रूट
शक्तिपीठ महामार्ग की घोषणा के बाद कई जिलों में किसानों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध किया था। लगातार हो रहे आंदोलन के बाद सरकार ने परियोजना के मूल नक्शे में बदलाव किया और नया रूट तय करते हुए नई अधिसूचना जारी कर दी।
सातारा के 19 गांव होंगे प्रभावित
नई योजना के अनुसार सातारा जिले की मान और खटाव तहसील के कुल 19 गांवों की जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाएगी। सरकार अब इन गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
802 से बढ़कर 856 किलोमीटर हुआ महामार्ग
पहले प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग की लंबाई 802 किलोमीटर थी, लेकिन रूट में बदलाव के बाद अब इसकी कुल लंबाई 856 किलोमीटर हो गई है। यह परियोजना अब राज्य महामार्ग SH-10 के नाम से विकसित की जाएगी।
नागपुर से गोवा का सफर होगा आसान
यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे वर्धा जिले के दिग्रस से सिंधुदुर्ग के बांदा तक जाएगा। सरकार का दावा है कि इसके बनने के बाद नागपुर से गोवा का सफर 18 घंटे से घटकर करीब 8 घंटे में पूरा हो सकेगा।
12 जिले, 400 गांव और 21 शक्तिपीठ जुड़ेंगे
यह एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र के 12 जिलों, 40 तहसीलों और करीब 400 गांवों से होकर गुजरेगा। साथ ही राज्य के 21 प्रमुख शक्तिपीठों को जोड़ने की योजना है, जिससे धार्मिक पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

