ICC पर अमेरिका का दबाव बढ़ा, ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के देशों को दी चेतावनी

वॉशिंगटन। अमेरिका और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के बीच टकराव तेज हो गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ICC पर अमेरिका विरोधी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाते हुए इसे कमजोर करने की बात कही है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन दुनिया भर के देशों पर ICC से दूरी बनाने का दबाव बना रहा है।
ICC का समर्थन करने वाले देशों पर दबाव
अमेरिका चाहता है कि उसकी आर्थिक या सुरक्षा सहायता पर निर्भर देश यह स्पष्ट करें कि वे अमेरिकी सैनिकों और अधिकारियों के खिलाफ ICC के किसी भी फैसले को नहीं मानेंगे। ऐसा नहीं करने वाले देशों को वीजा प्रतिबंध, यात्रा प्रतिबंध और आर्थिक प्रतिबंधों जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
क्यों बढ़ा विवाद?
अमेरिका और ICC के बीच विवाद नया नहीं है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ICC ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों द्वारा कथित युद्ध अपराधों की जांच शुरू की थी। इसके बाद अमेरिका ने ICC के कई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब अमेरिकी अधिकारी विभिन्न देशों से ICC की सदस्यता छोड़ने और उसे मिलने वाली वित्तीय सहायता रोकने की अपील कर रहे हैं।
ईरान और अल साल्वाडोर का भी जिक्र
मानवाधिकार संगठन DAWN ने ICC से ईरान से जुड़े मामलों में अमेरिका के कथित युद्ध अपराधों की जांच की मांग की है। हालांकि, मार्को रुबियो ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका ने कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं तोड़ा है।
क्या है ICC?
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) की स्थापना 2002 में हुई थी और इसका मुख्यालय हेग (नीदरलैंड) में है। यह अदालत नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों की जांच और सुनवाई करती है।
वर्तमान में 124 देश ICC के सदस्य हैं, जबकि अमेरिका, भारत, चीन और रूस इसके सदस्य नहीं हैं।
अमेरिका को किस बात का डर है?
अमेरिका का मानना है कि ICC उसके सैनिकों और अधिकारियों के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई कर सकता है। इसी कारण उसने 2002 में American Service-Members’ Protection Act लागू किया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों को ICC की कार्रवाई से बचाना है। इसी वजह से अमेरिका लंबे समय से ICC के अधिकार क्षेत्र का विरोध करता रहा है।

