E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं? संसद में सरकार ने बताई वजह, कहा- मकसद कीमत घटाना नहीं, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना है

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को सस्ती कीमत पर बेचने की कोई योजना नहीं है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है।
लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि E20 पेट्रोल की कीमत केवल इथेनॉल की लागत से तय नहीं होती। इसमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, परिवहन लागत, टैक्स और तेल कंपनियों के परिचालन खर्च जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
इथेनॉल खरीदना भी सस्ता नहीं
सरकार के अनुसार, इथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 में सरकारी तेल कंपनियों के लिए इथेनॉल की औसत खरीद लागत जीएसटी और परिवहन खर्च सहित करीब 71 रुपये प्रति लीटर है। गन्ने के रस, मोलासेस और मक्के जैसे अलग-अलग स्रोतों से बनने वाले इथेनॉल की कीमत भी अलग-अलग होती है।
तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान
सरकार ने बताया कि मार्च से जून 2026 के बीच पेट्रोल की बाजार आधारित कीमत के मुकाबले खुदरा कीमत कम रखने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को औसतन 11 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी हुई। चार महीनों में यह नुकसान करीब 21,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ऐसे में E20 पेट्रोल पर अलग से छूट देना संभव नहीं है।
पश्चिम एशिया संकट में मिला बड़ा फायदा
सरकार का दावा है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान इथेनॉल ब्लेंडिंग का सबसे बड़ा लाभ देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सरकार के मुताबिक, अगर इथेनॉल मिश्रण नहीं होता तो पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।
E20 से वाहनों को नुकसान नहीं
वाहनों पर E20 के असर को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने कहा कि यह कार्यक्रम नीति आयोग, वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों और तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। सरकार के अनुसार, देश में करोड़ों दोपहिया और पेट्रोल कारें लंबे समय से E20 पर चल रही हैं और अब तक इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने जैसी कोई प्रमाणित शिकायत सामने नहीं आई है। वाहन निर्माता कंपनियां भी E20 वाहनों पर वारंटी दे रही हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल को सस्ते ईंधन के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आयात निर्भरता घटाने, कीमतों को स्थिर रखने और किसानों को लाभ पहुंचाने वाली दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।

