Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की नई पहचान बना भोरमदेव जंगल सफारी,

एक महीने में 489 से ज्यादा पर्यटक पहुंचे

कवर्धा। छत्तीसगढ़ का भोरमदेव जंगल सफारी अब प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बनाने लगा है। शुरुआत के पहले ही महीने में यहां सैकड़ों पर्यटक पहुंचे और जंगल सफारी ने न सिर्फ प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित किया, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का नया जरिया भी बन गई। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल सफल होती नजर आ रही है।

पहले महीने में 489 से ज्यादा पर्यटक पहुंचे

भोरमदेव जंगल सफारी शुरू होने के बाद पहले ही महीने में 489 से अधिक पर्यटकों ने यहां सफारी का आनंद लिया। इस दौरान करीब 2.75 लाख रुपये से ज्यादा की आय हुई। इसका सबसे बड़ा फायदा स्थानीय युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और वन प्रबंधन समितियों को मिला।

स्थानीय लोगों को मिला रोजगार

जंगल सफारी के संचालन से स्थानीय युवाओं को गाइड, वाहन चालक और गेटकीपर के रूप में रोजगार मिला। महज एक महीने में 17 युवाओं ने 75 हजार रुपये से ज्यादा की कमाई की। वहीं, वन प्रबंधन समिति को 92 हजार रुपये, वन विभाग को 26 हजार रुपये और महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन को 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ हुआ।

इससे गांव की महिलाओं को भी आर्थिक मजबूती मिली और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

फिलहाल बारिश के कारण बंद है सफारी

डीएफओ निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का शुभारंभ 3 मई को किया गया था और अगले ही दिन इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। हालांकि, मानसून को देखते हुए फिलहाल सफारी का संचालन बंद कर दिया गया है। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद नवंबर से फिर से जंगल सफारी शुरू होगी

प्राकृतिक उद्यान भी बना आकर्षण

जंगल सफारी के अलावा भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बन गया है। अब तक 1500 से अधिक पर्यटक यहां घूमने पहुंच चुके हैं। हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को खूब पसंद आ रही है।

वन्यजीवों की साइटिंग बना रही सफर यादगार

करीब 36 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी, जंगली मुर्गा, रंग-बिरंगी तितलियां और कई प्रजातियों के पक्षियों को करीब से देखने का मौका मिलता है। कई बार पर्यटकों को बाघ के पदचिह्न भी देखने को मिलते हैं, जो इस सफारी का रोमांच और बढ़ा देते हैं।

भोरमदेव जंगल सफारी ने यह साबित कर दिया है कि अगर पर्यटन को स्थानीय लोगों की भागीदारी से जोड़ा जाए तो इससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलती है।

 

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