Follow Us on Our Social Media
National

म्यांमार से आने वाली ड्रग्स का गेटवे बना मिजोरम: 8 माह में 846 करोड़ की ड्रग्स जब्त, 930 गिरफ्तार

 दिल्ली। म्यांमार से भारत में ड्रग्स (DRUGS) की तस्करी के लिए मिजोरम प्रमुख रास्ता बनता जा रहा है। भारत-म्यांमार की करीब 510 किलोमीटर लंबी खुली सीमा का फायदा तस्कर उठा रहे हैं।

जंगलों, पहाड़ी रास्तों और सीमावर्ती गांवों के जरिए हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसी ड्रग्स भारत पहुंचाई जा रही हैं। पिछले 8 महीनों में मिजोरम में 846 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की ड्रग्स जब्त की गई हैं। इस दौरान 930 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 111 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

तस्करी के बढ़ते नेटवर्क के बीच सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। हाल ही में असम राइफल्स ने 2 अक्टूबर को मिजोरम के जोते इलाके में 2.5 किलो हेरोइन जब्त की थी। इसकी कीमत करीब 5.07 करोड़ रुपए बताई गई। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले भी राज्य के अलग-अलग इलाकों में करोड़ों रुपए की ड्रग्स पकड़ी जा चुकी हैं।

एंबुलेंस तक का इस्तेमाल, 45 करोड़ की ड्रग्स पकड़ी

मिजोरम में तस्करी के नेटवर्क का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ड्रग्स की खेप पहुंचाने के लिए सामान्य वाहनों के साथ एंबुलेंस का भी इस्तेमाल किया गया। 8 अगस्त को सेलिंग के पास एक एंबुलेंस से 15 किलो मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद हुई थीं। इनकी कीमत करीब 45 करोड़ रुपए बताई गई। कार्रवाई के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

12 सितंबर को सेलिंग में ही 6.9 किलो मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद हुईं। इनकी कीमत करीब 5.59 करोड़ रुपए थी। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। लगातार हो रही बरामदगी से संकेत मिलता है कि मिजोरम के रास्ते ड्रग्स की सप्लाई का नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा है।

ईडी की कार्रवाई में 4.8 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क

ड्रग्स तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कार्रवाई कर रहा है। ईडी की ताजा जांच में म्यांमार के सरगना थिंगचुंगआंग उर्फ चिंतुआंग से जुड़े 22 बैंक खातों से करीब 4.8 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की गई है।

जांच में सामने आया कि नेटवर्क सिर्फ ड्रग्स (DRUGS) की सीमा पार तस्करी तक सीमित नहीं था। इसमें ड्रग्स की खरीद, म्यांमार से भारत तक परिवहन, स्टोरेज, देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई और भुगतान की व्यवस्था तक कई लोग जुड़े थे। अवैध कमाई को छिपाने के लिए हवाला और बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल किया जाता था।

भारत से म्यांमार जाता था कच्चा माल

इस पूरे नेटवर्क की एक अहम कड़ी यह भी सामने आई है कि तस्करी सिर्फ एक दिशा में नहीं होती थी। भारत से कुछ ऐसे रसायन म्यांमार भेजे जाते थे, जिनका इस्तेमाल वहां अवैध रूप से ड्रग्स तैयार करने में किया जाता था।

जांच के मुताबिक गुजरात समेत भारत के अन्य हिस्सों से स्यूडोएफेड्रिन टैबलेट और कैफीन एन्हाइड्रस जैसे केमिकल मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचाए जाते थे। वहां मौजूद अवैध लैब में इनका इस्तेमाल ड्रग्स तैयार करने के लिए किया जाता था। तैयार होने के बाद इन्हीं ड्रग्स को दोबारा मिजोरम के रास्ते भारत में भेजा जाता था।

इस तरह नेटवर्क में भारत से कच्चा माल बाहर भेजने और तैयार ड्रग्स को वापस भारत लाने की दोतरफा चेन काम कर रही थी। ईडी की पिछली जांच में प्रिकर्सर केमिकल की करोड़ों रुपए की सप्लाई और उससे जुड़े हवाला लेन-देन के लिंक भी सामने आए थे।

म्यूल अकाउंट और फ्रंट कंपनियों से रकम घुमाई

ड्रग्स कारोबार से होने वाली कमाई को छिपाने के लिए तस्करों ने बैंकिंग नेटवर्क की अलग परत तैयार कर रखी थी। अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए गए। इन खातों में ड्रग्स से जुड़ी रकम जमा करने के बाद तेजी से दूसरे खातों में ट्रांसफर की जाती थी।

जांच एजेंसियों को ऐसे कई म्यूल बैंक अकाउंट मिले हैं, जिनका इस्तेमाल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में घुमाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा फ्रंट कंपनियों के नाम पर भी वित्तीय लेन-देन किए जाने की जानकारी सामने आई है।

कुछ ऑपरेटरों के बैंक खातों में 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन मिला है। जांच में चिंतुआंग से जुड़े भारतीय बैंक खातों की जानकारी मिलने के बाद एजेंसियों ने मनी ट्रेल को खंगाला। इसके आधार पर ड्रग्स की कमाई और उसे अलग-अलग खातों के जरिए वैध दिखाने की कोशिशों का पता लगाया गया।

सीमा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

मिजोरम की भौगोलिक स्थिति और म्यांमार से लगी लंबी खुली सीमा तस्करों (DRUGS) के लिए चुनौतीपूर्ण इलाकों को फायदा उठाने का मौका देती है। पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्रों में कई छोटे रास्तों के जरिए तस्करी की कोशिश की जाती है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे नेटवर्क पर लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रही हैं।

आठ महीनों में 846 करोड़ रुपए से ज्यादा की ड्रग्स की बरामदगी और 930 गिरफ्तारियां बताती हैं कि राज्य में नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क कितना बड़ा है। इनमें 111 विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी से यह भी संकेत मिलता है कि इस कारोबार के तार भारत से बाहर तक जुड़े हुए हैं।

लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद ड्रग्स की नई खेप पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती बनी हुई है। अब जांच का फोकस केवल तस्करों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रग्स की सप्लाई, फंडिंग, हवाला और सीमा पार नेटवर्क को तोड़ने पर भी है।

Follow Us on Our Social Media

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button