ChhattisgarhRaipur

CG NEWS : डीएड अभ्यर्थियों की सख्त चेतावनी, बन जाएंगे नक्सली

हमारी कलम और हमारा हक हमसे छीना

  • नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर पिछले 6 महीनों से जारी है अनशन।
  • अंगारों पर चले, घुटनों के बल रेंगे, जल समाधि की कोशिश की, पर सोई रही सरकार।
  • हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी 1326 पात्र डीएड अभ्यर्थी नौकरी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर।

CG NEWS रायपुर। “यदि सरकार ने हमें न्याय नहीं दिया, हमारी कलम और हमारा हक हमसे छीना, तो हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचेगा। हम मजबूरन हथियार उठाएंगे और नक्सली बन जाएंगे।”

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तूता मैदान से गूंजी यह आवाज किसी अपराधी या कट्टरपंथी की नहीं है। यह उस देश और राज्य के भविष्य (भावी शिक्षकों) की चित्कार है, जो पिछले 3 महीनों से धूल, धूप और आंसुओं के बीच खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास का वो स्याह पन्ना है जहां देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के आदेश की कॉपियां हाथ में लिए युवा अपने रोजगार की भीख मांग रहे हैं, और व्यवस्था कान में तेल डाले सोई हुई है।

अंगारों पर चलने के बाद भी नहीं पिघला दिल

यह सिर्फ एक धरना नहीं, बल्कि युवाओं की प्रताड़ना की वो दास्तान है जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कांप जाए। पिछले 3 महीने से अनशन पर बैठे इन डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए क्या नहीं किया?

  • वे जलती हुई धूप में दहकते अंगारों पर चले।
  • वे न्याय की गुहार लगाते हुए घुटनों के बल रेंगकर अफसरों के दरवाजों तक पहुंचे।
  • उन्होंने नदी में जल समाधि लेने की कोशिश की।
  • कई अभ्यर्थी अनशन करते-करते गंभीर रूप से बीमार हुए और अस्पताल के आईसीयू (ICU) तक पहुंचे।

लेकिन संवेदनशीलता का दावा करने वाली सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के माथे पर जूं तक नहीं रेंगी। आज ये बेरोजगार इस कदर टूट चुके हैं कि उनकी आंखों का पानी अब गुस्से के बारूद में तब्दील होने लगा है।

कोर्ट का आदेश जेब में, प्रशासनिक लापरवाही का खेल

इस पूरी बदहाली और विवाद की जड़ में शिक्षा विभाग की एक बहुत बड़ी प्रशासनिक लापरवाही है। कहानी की शुरुआत बिलासपुर हाईकोर्ट और देश की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक फैसलों से होती है:

  • अदालत का फैसला: बिलासपुर हाईकोर्ट (2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025) और सुप्रीम कोर्ट (28 अगस्त 2024) ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सहायक शिक्षक भर्ती से अमान्य किए गए 2621 बीएड (B.Ed) धारकों के स्थान पर केवल और केवल डीएड (D.Ed) प्रशिक्षित पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी जाएं।
  • विभाग की बड़ी चूक: कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग को भर्ती करनी थी। लेकिन विभाग ने एक अजीबोगरीब और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया अपनाई। उन्होंने ‘कॉमन मेरिट सूची’ के आधार पर पहले स्कूलों का आवंटन कर दिया और दस्तावेजों का सत्यापन (Document Verification) बाद में किया।
  • अपात्रों को रेवड़ी, पात्रों को ठेगा: इस उल्टी गंगा का नतीजा यह हुआ कि जिन उम्मीदवारों के पास न तो डीएड की डिग्री थी, न टीईटी (TET) पास थे और जो उम्र सीमा पार कर चुके थे, उन्हें भी स्कूल अलॉट हो गए।

जब छानबीन हुई तो 2621 पदों में से केवल 1299 योग्य उम्मीदवारों को ही नियुक्ति मिल पाई। नियमों के इस खिलवाड़ के कारण 1326 पद आज भी खाली पड़े हैं, और इतने ही योग्य डीएड अभ्यर्थी मेरिट में होने के बावजूद सड़कों पर रातें काट रहे हैं।

प्रदेश में बेरोजगारों की बदहाली

छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की यह बदहाली पहली नहीं है, लेकिन इस मामले ने सरकार के ‘सुशासन’ के दावों की पोल खोल दी है। युवा कोई विशेष रियायत या रहम की भीख नहीं मांग रहे हैं; वे सिर्फ अपना वह वैधानिक अधिकार मांग रहे हैं जिस पर देश की न्यायपालिका ने मुहर लगाई है।

बेरोजगारों का आरोप है कि शिक्षा विभाग जानबूझकर मामले को अटकाए रखना चाहता है। एक तरफ राज्य में शिक्षकों की भारी कमी के कारण ग्रामीण इलाकों के स्कूल तालों के भरोसे हैं, बच्चे बिना शिक्षकों के पढ़ रहे हैं; वहीं दूसरी तरफ योग्य शिक्षक सड़क पर अनशन करके अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं।

युवाओं का दर्द: “हमने सालों तक पढ़ाई की, कर्ज लेकर फीस भरी, कोर्ट में लड़ाई जीती। अब जब नौकरी का समय आया तो हमें जेलर जैसी जिंदगी जीने पर मजबूर कर दिया गया है। जब कलम पकड़ने वाले हाथों को न्याय नहीं मिलेगा, तो वे व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह क्यों नहीं करेंगे?”

राजनीतिक गलियारों में हलचल, पर हल गायब

इस आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अमित जोगी पीएम मोदी का मुखौटा पहनकर अभ्यर्थियों के समर्थन में उतर चुके हैं, कांग्रेस और विपक्ष के नेता लगातार धरना स्थल पहुंचकर सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, राज्य के अतिथि शिक्षक भी इच्छा मृत्यु की मांग कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ का युवा इस समय चौतरफा हताशा के दौर से गुजर रहा है।

चेतावनी को हल्के में लेना पड़ेगा भारी

नया रायपुर के तूता मैदान से उठी ‘हथियार उठाने’ और ‘नक्सली बनने’ की यह चेतावनी भले ही गुस्से और हताशा में कही गई बात लगे, लेकिन यह लोकतंत्र के लिए एक बेहद खतरनाक अलार्म है। जब पढ़ा-लिखा युवा न्याय तंत्र और चुनी हुई सरकार से भरोसा खोने लगता है, तो देश का आंतरिक ढांचा कमजोर होता है।

सरकार को इस ‘प्रशासनिक प्रताड़ना’ को तुरंत बंद करना चाहिए। खाली पड़े 1326 पदों पर तत्काल पारदर्शी तरीके से डीएड अभ्यर्थियों की काउंसलिंग कर उन्हें ज्वाइनिंग दी जानी चाहिए, इससे पहले कि इन युवाओं का सब्र पूरी तरह टूट जाए और छत्तीसगढ़ का भविष्य अंधकार की गर्त में चला जाए।

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