ChhattisgarhRaipur

छत्तीसगढ़ के 1300 शिक्षक पद—जमीन निगल गई या आसमान खा गया?

रायपुर: छत्तीसगढ़ के गलियारों में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है— “वो 1300 पद कहां गए?” यह सवाल उन हजारों शिक्षित बेरोजगार युवाओं का है, जो एक अदद सरकारी नौकरी की उम्मीद में अपनी आंखें बिछाए बैठे हैं।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र से लेकर आज तक के सरकारी बयानों के बीच जो ‘गणित’ उलझा है, उसने प्रदेश के अभ्यर्थियों को हताशा के मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीते शीतकालीन सत्र के दौरान, छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही में शिक्षा मंत्री द्वारा आधिकारिक तौर पर जानकारी दी गई थी कि विभाग में 1300 पद रिक्त हैं। इस घोषणा ने उन युवाओं के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी, जो लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे थे।

लेकिन, महज ढाई महीने के भीतर दावों की हवा बदल गई है। अब विभाग और मंत्री स्तर से यह संकेत मिल रहे हैं कि इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।

युवाओं के तीखे सवाल: ढाई महीने में ‘जादू’ कैसे?

अभ्यर्थियों का तर्क वाजिब है। किसी भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में विज्ञापन निकालने से लेकर, परीक्षा आयोजन, परिणाम और काउंसलिंग तक में महीनों, कभी-कभी सालों लग जाते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है:

  • अगर पद खाली थे, तो क्या बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के ये पद भर लिए गए?
  • अगर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, तो वे खुशकिस्मत उम्मीदवार कौन हैं जिन्हें नियुक्तियां मिलीं?
  • क्या ढाई महीने का समय 1300 पदों की जटिल भर्ती प्रक्रिया के लिए पर्याप्त है?

“हम किताबों में दिन-रात एक कर देते हैं ताकि एक पद पा सकें, लेकिन जब सदन में स्वीकार किए गए पद अचानक कागजों से गायब हो जाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हमारी मेहनत को ही सिस्टम निगल गया।” — एक हताश अभ्यर्थी

भरोसे की दरार

लोकतंत्र में विधानसभा के भीतर दिया गया बयान सबसे विश्वसनीय माना जाता है। यदि वहां 1300 पदों की रिक्तता स्वीकार की गई थी, तो युवाओं को उम्मीद थी कि जल्द ही उनके लिए अवसर के द्वार खुलेंगे। लेकिन अब “प्रक्रिया पूर्ण” होने का दावा एक रहस्यमयी पहेली बन गया है।

अदृश्य भर्ती कब और कैसे?

यह केवल 1300 नौकरियों का सवाल नहीं है, बल्कि यह उस पारदर्शिता का सवाल है जिसके दम पर कोई भी सरकार युवाओं का विश्वास जीतती है। क्या विभाग इन गायब हुए पदों का हिसाब देगा, या फिर ये 1300 पद भी फाइलों के ढेर में कहीं गुम हो जाएंगे?

प्रदेश का युवा वर्ग अब स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है। वे पूछ रहे हैं कि आखिर वो ‘अदृश्य’ भर्ती कब और कैसे हुई, जिसका पता किसी को नहीं चला?

Follow Us on Our Social Media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button