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हैदराबाद में SIR अभियान पर सियासी घमासान,

ओवैसी ने उठाए दस्तावेज नियमों पर सवाल

हैदराबाद-हैदराबाद में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर राजनीति गरमा गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मौजूदा नियम आम लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं।

12 दस्तावेजों की शर्त पर आपत्ति

ओवैसी का कहना है कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए कई दस्तावेज तेलंगाना में आसानी से उपलब्ध ही नहीं हैं। ऐसे में आम नागरिकों के लिए अपनी पहचान और पात्रता साबित करना मुश्किल हो सकता है। उनका दावा है कि इससे कई योग्य मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने का खतरा पैदा हो सकता है।

किन दस्तावेजों पर उठे सवाल?

ओवैसी ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) तेलंगाना में लागू नहीं है। राज्य में स्थायी निवास प्रमाणपत्र और फैमिली रजिस्टर जैसी व्यवस्थाएं भी नहीं हैं। इसके अलावा आधार कार्ड को अकेले पर्याप्त दस्तावेज नहीं माना जा रहा है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

पैन कार्ड को शामिल करने की मांग

ओवैसी ने सुझाव दिया कि पैन कार्ड को भी वैध पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह एक भरोसेमंद सरकारी दस्तावेज है और अन्य पहचान पत्रों के साथ आसानी से सत्यापित किया जा सकता है।

2002 की वोटर लिस्ट पर भी सवाल

ओवैसी ने 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक उस समय की सूची में कई तकनीकी और रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियां थीं। ऐसे में पुरानी गलतियों का असर आज के मतदाताओं पर नहीं पड़ना चाहिए।

उर्दू भाषियों की परेशानी का मुद्दा

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फॉर्म केवल अंग्रेजी और तेलुगु में उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि हैदराबाद में उर्दू दूसरी आधिकारिक भाषा है। इससे उर्दू भाषी नागरिकों को फॉर्म भरने में दिक्कत हो सकती है।

क्या है आगे की समयसीमा?
  • 31 जुलाई: ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी।
  • 31 जुलाई से 30 अगस्त: दावा और आपत्ति दर्ज कराने का समय।
  • 1 अक्टूबर: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
    बैकडोर NRC का आरोप

ओवैसी ने चेतावनी दी कि यदि प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया गया तो यह अप्रत्यक्ष रूप से “बैकडोर NRC” जैसा प्रभाव पैदा कर सकती है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इस मुद्दे पर अलग दृष्टिकोण रखा जा रहा है और प्रक्रिया को मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद बताया जा रहा है।

फिलहाल SIR अभियान को लेकर बहस तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गर्मा सकता है।

 

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