शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा छात्र आंदोलन, सरकार से बातचीत में नहीं बनी सहमति

नई दिल्ली। पेपर लीक मामले पर सख्त कानून को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भी छात्रों का आंदोलन जारी है। शुक्रवार को सरकार और छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
बैठक के बाद CJP ने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि छात्रों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है और सरकार को इससे अवगत करा दिया गया है।
इस मुद्दे पर विपक्ष भी सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए, उसके बाद शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफा नहीं हुआ तो विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी कहा कि मंत्री के इस्तीफे से पहले चर्चा का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं—प्रधानमंत्री की माफी, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को बीच का रास्ता सुझाते हुए कहा कि सरकार पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले और बाद में चाहे उन्हें दोबारा जिम्मेदारी दे दे। उनका कहना था कि सरकार को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी कहा कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो इसका राजनीतिक नुकसान सरकार को उठाना पड़ सकता है। वहीं CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक जारी रहेगा।
सरकार की ओर से अभी तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जवाब देने के लिए एक दिन का समय मांगा है। अब सभी की नजर 25 जुलाई पर है, जब सरकार का रुख स्पष्ट हो सकता है।

