विदेशी पूंजी बढ़ाने की तैयारी में सरकार, सरकारी बैंकों के साथ होगी अहम बैठक; रुपए को मजबूती देने पर जोर

भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने और रुपए को स्थिर करने के लिए केंद्र सरकार ने रणनीति तेज कर दी है। सरकार अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ मिलकर विदेशी निवेशकों और अनिवासी भारतीयों से पूंजी जुटाने के नए विकल्पों पर काम कर रही है। इसके तहत सरकारी बैंकों से व्यावहारिक सुझाव मांगे गए हैं, ताकि विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाया जा सके और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिले।
सरकार की योजना विदेशी मुद्रा जमा, एनआरआई निवेश और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश जैसे स्रोतों को बढ़ावा देने की है। वैश्विक बाजार में जारी अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर बढ़ते खर्च के बीच विदेशी पूंजी का प्रवाह रुपए की स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सरकारी बैंकों के साथ दो दिन होगी बैठक
वित्त मंत्रालय ने 17 और 18 अगस्त को नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ दो दिवसीय बैठक आयोजित करने का फैसला किया है। इस बैठक में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उपायों के साथ-साथ बैंक जमा बढ़ाने, निवेशकों को भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने और छोटे एवं मध्यम उद्यमों तक कर्ज की पहुंच बढ़ाने पर चर्चा होगी।
बैठक में सभी सरकारी बैंकों के प्रमुख शामिल होंगे। बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ऐसे उपायों पर भी विचार कर रही है जिनसे विदेशी निवेश के साथ घरेलू स्तर पर जमा राशि जुटाने की क्षमता मजबूत हो सके।
RBI की योजना से आया 40 अरब डॉलर
विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ने जून में सरकारी बैंकों की ओर से जुटाई गई विदेशी मुद्रा जमा और बाहरी वाणिज्यिक उधारी से जुड़ी डॉलर-स्वैप सुविधा का ऐलान किया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 30 जुलाई तक इस कार्यक्रम के तहत करीब 40 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत में आई, जिसमें FCNR जमा की हिस्सेदारी करीब 36 अरब डॉलर रही।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि FCNR जमा रुपए को तत्काल सहारा दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय के लिए FDI जैसे स्थायी निवेश स्रोतों को बढ़ाना जरूरी है। वित्त वर्ष 2026 में रुपए की कीमत में करीब 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी पूंजी में बढ़ोतरी से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सरकार का जोर अब ऐसे निवेश पर है जो लंबे समय तक भारतीय अर्थव्यवस्था में बना रहे और विकास को स्थायी आधार दे।



