चीन ने बदले सैन्य नियम, अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना सेना कर सकेगी जवाबी कार्रवाई

बीजिंग। चीन ने अपनी सेना की तैनाती से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब किसी देश के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए हर बार राष्ट्रपति की मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा। सेना के अधिकारी परिस्थितियों के अनुसार अपने स्तर पर कार्रवाई का फैसला ले सकेंगे।
चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, नए नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे। करीब 16 साल बाद सैनिकों की तैनाती को लेकर कानून में बड़ा बदलाव किया गया है। 82 अनुच्छेदों वाले इस कानून में राष्ट्रपति, सेना के शीर्ष अधिकारियों और मोर्चे पर तैनात सैनिकों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है।
सेना को मिलेगी ज्यादा स्वायत्तता
नए नियमों के मुताबिक, पहले किसी जवाबी कार्रवाई की योजना को राष्ट्रपति के पास भेजकर मंजूरी लेनी होती थी। अब सेना जरूरत पड़ने पर अपने स्तर पर कार्रवाई कर सकेगी और बाद में इसकी जानकारी राष्ट्रपति और विधायिका को देगी।
हालांकि, बड़े और महत्वपूर्ण मामलों में केंद्रीय सैन्य आयोग को विश्वास में लेने का प्रावधान रखा गया है। इस बदलाव को ताइवान, जापान और फिलीपींस के साथ संभावित सैन्य तनाव की आशंकाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युद्ध के दौरान सोशल मीडिया पर भी सख्ती
नए कानून में युद्ध की स्थिति में सोशल मीडिया और सूचना के प्रसार को नियंत्रित करने के अधिकार भी दिए गए हैं। सरकार और सेना विवादित या कथित रूप से फर्जी सूचनाओं वाले पोस्ट पर कार्रवाई कर सकती है। जरूरत पड़ने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।
पूरे देश के संसाधनों पर नियंत्रण
नए नियमों के तहत सैन्य कार्रवाई के दौरान सेना को परिवहन, दूरसंचार, सूचना नेटवर्क, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य आपूर्ति और वाणिज्य जैसे क्षेत्रों पर नियंत्रण लागू करने का अधिकार होगा।
वहीं युद्ध राहत और बचाव कार्यों में लगे लोगों को सेना में शामिल नहीं किए जाने की बात भी नए नियमों में कही गई है। चीन ने सैन्य भर्ती की आयु सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है।
इन बदलावों से चीन की सेना को संकट और युद्ध की स्थिति में तेजी से निर्णय लेने और व्यापक स्तर पर संसाधनों का इस्तेमाल करने की अधिक शक्ति मिलने की संभावना है।



