दिव्यांगों के लिए शिक्षक बनने के नए नियम, विशेष B.Ed के साथ RCI का जीवित पंजीयन भी जरूरी

रायपुर। दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों से जुड़ी बड़ी खबर है। अब विशेष शिक्षा से जुड़े शिक्षक पदों पर नियुक्ति के लिए केवल सामान्य B.Ed की डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। संबंधित दिव्यांगता के क्षेत्र में B.Ed की योग्यता हासिल करना जरूरी होगा। इसके साथ ही कई शिक्षक पदों के लिए रीहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया का जीवित पंजीयन भी अनिवार्य किया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने दिव्यांगों से जुड़े शिक्षक और अन्य पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित कर दी है। नए प्रावधानों में अलग-अलग दिव्यांगता के अनुसार शैक्षणिक योग्यता और विशेष प्रशिक्षण की शर्तें स्पष्ट की गई हैं। इससे उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, जो विशेष शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक के रूप में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
दिव्यांगों के लिए शिक्षक भर्ती के नियम बदले
नए नियमों के अनुसार विशेष शिक्षा से जुड़े शिक्षक पदों के लिए अभ्यर्थी के पास संबंधित दिव्यांगता के क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण होना जरूरी है। यानी केवल सामान्य B.Ed करने वाले अभ्यर्थी हर विशेष शिक्षक पद के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
उदाहरण के तौर पर विशेष शिक्षक (दृष्टि बाधित) के पद के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री के साथ दृष्टि बाधित क्षेत्र में B.Ed विशेष शिक्षा की योग्यता आवश्यक होगी। इसके साथ अभ्यर्थी का RCI में जीवित पंजीयन भी अनिवार्य किया गया है।
इसी तरह शिक्षक (दृष्टि बाधित) और प्रशिक्षित उच्च वर्ग शिक्षक (दृष्टि बाधित) के पदों के लिए भी स्नातक डिग्री के साथ दृष्टि बाधित क्षेत्र में B.Ed और RCI का जीवित पंजीयन जरूरी होगा।
अलग-अलग दिव्यांगता के लिए अलग योग्यता
नए प्रावधानों में दिव्यांगता के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग प्रशिक्षण और शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। शिक्षक के पद के लिए स्नातक डिग्री के साथ श्रवण बाधित क्षेत्र में B.Ed और RCI का जीवित पंजीयन आवश्यक होगा।
वहीं शिक्षक के लिए स्नातक के साथ बौद्धिक मंदता के क्षेत्र में B.Ed की योग्यता निर्धारित की गई है। कुछ पदों पर RCI पंजीयन की शर्त भी लागू होगी।
एकीकृत शिक्षक के पद के लिए स्नातक डिग्री के साथ दृष्टि बाधित अथवा श्रवण बाधित क्षेत्र में B.Ed की योग्यता मांगी गई है। इसके साथ RCI का जीवित पंजीयन भी जरूरी होगा।
दिव्यांगता के हिसाब से तय होगी योग्यता
नियमों में मोबिलिटी प्रशिक्षक के पद की योग्यता भी निर्धारित की गई है। मोबिलिटी प्रशिक्षक के लिए स्नातक डिग्री के साथ मान्यता प्राप्त संस्थान, विश्वविद्यालय या संबंधित संस्था से आवश्यक प्रशिक्षण की योग्यता मांगी गई है।
दृष्टि बाधित अभ्यर्थियों के लिए मोबिलिटी में डिप्लोमा तथा श्रवण बाधित क्षेत्र में संबंधित पद के लिए फिजिकल एजुकेशन में स्नातक डिग्री का प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें शिक्षा के साथ-साथ दैनिक गतिविधियों और आवश्यक कौशल में भी बेहतर मार्गदर्शन मिल सके।
बहुविकलांगता वाले विद्यार्थियों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण
प्रशिक्षित शिक्षक (बहु विकलांग) के पद के लिए भी विशेष योग्यता तय की गई है। इसके लिए स्नातक डिग्री के साथ बौद्धिक मंदता में B.Ed तथा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, हियरिंग इम्पेयर्ड, विजुअल इम्पेयर्ड या स्पेशल लर्निंग डिसेबिलिटी में से किसी एक विषय में B.Ed की योग्यता निर्धारित की गई है।
वहीं प्रशिक्षित शिक्षक (बौद्धिक मंदता) के लिए स्नातक डिग्री के साथ बौद्धिक मंदता में B.Ed और RCI का जीवित पंजीयन आवश्यक होगा।
प्रशिक्षित शिक्षक (श्रवण बाधित) के लिए श्रवण बाधित क्षेत्र में B.Ed, जबकि प्रशिक्षित शिक्षक (दृष्टि बाधित) के लिए दृष्टि बाधित क्षेत्र में B.Ed की योग्यता रखी गई है।
समाज कल्याण विभाग के पदों के लिए भी योग्यता तय
नए नियम केवल शिक्षक पदों तक सीमित नहीं हैं। समाज कल्याण विभाग से जुड़े प्रशिक्षक, व्यावसायिक शिक्षक और व्यावसायिक प्रशिक्षक पदों के लिए भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है।
इन पदों के लिए 10+2 पद्धति से हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण होना और संबंधित ट्रेड में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, संस्था, पॉलिटेक्निक या ITI से डिग्री अथवा डिप्लोमा होना जरूरी होगा।
इसके अलावा मूक-बधिर शिक्षक के पद के लिए कला संकाय में स्नातक और D.Ed की योग्यता निर्धारित की गई है। वहीं निम्न वर्ग शिक्षक के लिए स्नातक के साथ बौद्धिक मंदता में D.Ed या अस्थि बाधित बाल गृह के लिए D.Ed की योग्यता का प्रावधान किया गया है।
संगीतकार के पद के लिए संबंधित विषय में स्नातक स्तर की उपाधि अथवा स्नातक के साथ DID की उपाधि का प्रावधान रखा गया है।
अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव?
नए नियमों का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षक या प्रशिक्षक के पदों पर नियुक्ति की तैयारी कर रहे हैं। अब उम्मीदवारों को केवल सामान्य शैक्षणिक योग्यता पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित दिव्यांगता क्षेत्र में आवश्यक विशेष प्रशिक्षण और डिग्री हासिल करनी होगी।
खासकर जिन पदों पर RCI का जीवित पंजीयन अनिवार्य किया गया है, वहां आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को अपने पंजीयन की वैधता जरूर जांचनी होगी। इससे भर्ती प्रक्रिया में पात्रता को लेकर स्पष्टता आएगी और विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को प्रशिक्षित एवं योग्य शिक्षक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इसलिए शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए जरूरी है कि वे जिस पद के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उसकी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, विशेष B.Ed या D.Ed की आवश्यकता और RCI पंजीयन की शर्तों को ध्यान से जांच लें।



