राजीव गांधी से मोदी सरकार तक: 42 साल में 8 वित्त मंत्रियों ने नहीं लड़ा लोकसभा चुनाव, एक को मिली हार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार में वित्त मंत्री का पद देश की आर्थिक नीतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बजट, टैक्स और आर्थिक फैसलों का सीधा असर आम लोगों और कारोबारियों पर पड़ता है। हालांकि, पिछले करीब 42 वर्षों में केंद्र के कई वित्त मंत्री जनता के बीच जाकर लोकसभा चुनाव लड़ने से दूर रहे हैं। 1984 के बाद से अब तक 8 वित्त मंत्रियों ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, जबकि एक वित्त मंत्री ने चुनाव लड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
मौजूदा मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा सदस्य हैं और लोकसभा चुनाव नहीं लड़कर संसद पहुंची हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे कई प्रमुख मंत्री लोकसभा चुनाव जीतकर सरकार में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
राजीव गांधी सरकार: शंकर राव चव्हाण ने चुनाव नहीं लड़ा
1984 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद वीपी सिंह, एनडी तिवारी और शंकर राव चव्हाण ने वित्त मंत्रालय संभाला। 1989 के लोकसभा चुनाव से पहले शंकर राव चव्हाण चुनाव मैदान में नहीं उतरे। उनकी जगह कांग्रेस ने उनके बेटे अशोक चव्हाण को नांदेड़ से उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
चंद्रशेखर सरकार: यशवंत सिन्हा चुनाव से दूर रहे
राजीव गांधी के बाद वीपी सिंह की सरकार बनी, लेकिन उसके बाद चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने। उनकी सरकार में यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री थे। 1991 के लोकसभा चुनाव में सिन्हा चुनाव मैदान में नहीं उतरे।
मनमोहन सिंह: पहले चुनाव नहीं लड़ा, फिर हार का सामना
1991 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया गया। 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। हालांकि, 1999 में वे दक्षिण दिल्ली सीट से चुनाव मैदान में उतरे, जहां उन्हें हार मिली। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा।
अटल सरकार: जसवंत सिंह ने चुनाव नहीं लड़ा, यशवंत सिन्हा हार गए
1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में जसवंत सिंह और यशवंत सिन्हा ने अलग-अलग समय पर वित्त मंत्रालय संभाला। 2004 में जसवंत सिंह लोकसभा चुनाव नहीं लड़े, जबकि यशवंत सिन्हा हजारीबाग से मैदान में उतरे। उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
चिदंबरम ने चुनाव जीता, लेकिन बाद में नहीं लड़े
2004 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने और पी. चिदंबरम को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। 2009 के चुनाव से पहले वित्त मंत्रालय मनमोहन सिंह ने अपने पास रखा। चिदंबरम ने 2009 में गृह मंत्री के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में प्रणब मुखर्जी को वित्त मंत्रालय सौंपा गया।
2012 में प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद पी. चिदंबरम फिर वित्त मंत्री बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में चिदंबरम खुद चुनाव मैदान में नहीं उतरे। कांग्रेस ने उनकी जगह उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को टिकट दिया, लेकिन वे चुनाव हार गए।
अरुण जेटली ने अमृतसर से चुनाव लड़ा और हार गए
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद अरुण जेटली को वित्त मंत्री बनाया गया। जेटली ने 2014 का लोकसभा चुनाव अमृतसर सीट से लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वे मोदी सरकार में वित्त मंत्री बने।
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पीयूष गोयल के पास वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था। 2019 में जेटली और गोयल दोनों लोकसभा चुनाव मैदान में नहीं उतरे।
निर्मला सीतारमण ने लोकसभा चुनाव लड़ने से किया इनकार
2019 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री बनाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।
इस तरह पिछले चार दशकों से अधिक के रिकॉर्ड में वित्त मंत्रालय संभालने वाले कई नेताओं का लोकसभा चुनाव से अलग रहना एक उल्लेखनीय राजनीतिक पैटर्न रहा है। हालांकि, वित्त मंत्री का लोकसभा चुनाव लड़ना या न लड़ना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है।



