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हंसी-मजाक के नाम पर बच्चों को कर रहे टॉर्चर! क्लासरूम से सोशल मीडिया तक पहुंची बुलिंग

छत्तीसगढ़ में सामने आए डराने वाले मामले

रायपुर। स्कूल… जहां बच्चे पढ़ाई के साथ दोस्ती करना, खेलना और जिंदगी के नए अनुभव सीखते हैं। लेकिन क्या हो, जब यही स्कूल किसी बच्चे के लिए डर और अपमान की जगह बन जाए? दोस्तों के बीच होने वाला हंसी-मजाक कब किसी बच्चे को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे, कई बार इसका अंदाजा परिवार और शिक्षकों को भी नहीं हो पाता।

किसी के छोटे कद पर टिप्पणी करना, वजन या रंग-रूप को लेकर नाम रखना, बार-बार चिढ़ाना या पूरी क्लास के सामने मजाक उड़ाना… शुरुआत में ये बातें सामान्य लग सकती हैं। लेकिन जब यही व्यवहार लगातार होने लगे और किसी बच्चे को डराने, अपमानित करने या समूह से अलग करने के लिए किया जाए, तो इसे बुलिंग कहा जाता है।

अब बुलिंग सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो डालकर मजाक उड़ाना, ऑनलाइन ग्रुप में अपमानित करना और धमकी देना भी बच्चों के लिए बड़ी परेशानी बन रहा है। 5 नवंबर को स्कूलों में हिंसा और बुलिंग के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।

सिर्फ मारपीट नहीं, चार तरह से होती है बुलिंग

बुलिंग को अक्सर केवल मारपीट से जोड़कर देखा जाता है, जबकि इसके कई रूप हैं।

  1. शारीरिक बुलिंग: किसी बच्चे को मारना, धक्का देना, उसका सामान छीनना या उसे शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाना।
  2. मौखिक बुलिंग: गाली देना, चिढ़ाना, अपमानजनक नाम रखना और बार-बार किसी की कमजोरियों का मजाक उड़ाना।
  3. सामाजिक बुलिंग: किसी बच्चे को दोस्तों के समूह से अलग करना, उसके बारे में अफवाह फैलाना या जानबूझकर उसका बहिष्कार करना।
  4. साइबर बुलिंग: सोशल मीडिया पर ट्रोल करना, आपत्तिजनक मैसेज भेजना, तस्वीरों और वीडियो के जरिए अपमानित करना या ऑनलाइन धमकाना।

इन सभी स्थितियों में पीड़ित बच्चा खुद को अकेला महसूस कर सकता है। कई बार डर, शर्मिंदगी या बदले की आशंका के कारण वह अपने माता-पिता और शिक्षकों को भी कुछ नहीं बताता।

रायपुर में सामने आए बुलिंग और हिंसा के मामले

केस 1: मारपीट का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला

अगस्त 2026 में रायपुर के एक स्वामी आत्मानंद स्कूल में नौवीं कक्षा के छात्र के साथ सहपाठी की मारपीट का मामला सामने आया। शिकायत के मुताबिक, मारपीट का वीडियो बनाया गया और बाद में उसे रील के रूप में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया गया।

पीड़ित छात्र के परिवार ने स्कूल प्रबंधन से शिकायत की, लेकिन परिजनों ने कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। लगातार परेशान होने के बाद छात्र ने स्कूल से टीसी ले ली। यह मामला दिखाता है कि अब बच्चों के बीच होने वाली मारपीट को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालना भी अपमानित करने का जरिया बन रहा है।

केस 2: अंग्रेजी में सवाल पूछकर चिढ़ाया, फिर पीट-पीटकर ले ली जान

जुलाई 2022 में रायपुर के भानपुरी में एक बेहद गंभीर घटना सामने आई थी। दसवीं कक्षा का छात्र पूरक परीक्षा देने दूसरे स्कूल गया था। परीक्षा के बाद वहां मौजूद कुछ छात्रों ने उससे अंग्रेजी में सवाल पूछकर चिढ़ाना शुरू कर दिया।

छात्र ने इसका विरोध किया तो उसे घेरकर लात-घूंसों से पीटा गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। यह घटना बताती है कि बच्चों के बीच शुरू होने वाला मजाक और विवाद किस तरह गंभीर हिंसा में बदल सकता है।

SCERT की रिपोर्ट में भी सामने आई चिढ़ाने की समस्या

छत्तीसगढ़ एससीईआरटी की स्कूल छोड़ने के कारणों पर आधारित अध्ययन रिपोर्ट में भी विद्यार्थियों के साथ होने वाले इस तरह के व्यवहार का उल्लेख किया गया है।

रायपुर के विद्यार्थियों ने बताया कि उनके साथी छोटे कद, वजन और रंग-रूप के आधार पर उन्हें छोटू, मोटू और बिल्ली जैसे नामों से चिढ़ाते थे। कुछ विद्यार्थियों ने जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल से अपमानित किए जाने की शिकायत भी की।

रिपोर्ट में शिक्षकों की उदासीनता का भी उल्लेख किया गया। यानी कई बार बच्चों के साथ होने वाली ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद समय पर ध्यान नहीं दिया जाता।

स्कूलों में बुलिंग रोकने के लिए शिकायत कमेटियां

स्कूलों में बुलिंग की घटनाओं को रोकने के लिए शिकायत और जागरूकता से जुड़ी व्यवस्थाएं की जाती हैं। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के मुताबिक, स्कूलों में हर कक्षा और सेक्शन में प्रतिनिधि नियुक्त करने की व्यवस्था की जाती है। उनके अध्यक्ष या प्रभारी का संपर्क नंबर विद्यार्थियों के साथ साझा किया जाता है।

कई स्कूलों में गुमनाम शिकायत करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि बच्चे बिना किसी डर के अपनी परेशानी बता सकें। इसके अलावा साल में दो से तीन बार बुलिंग के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम और वर्कशॉप आयोजित की जाती हैं।

बुलिंग से बच्चों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

मनोवैज्ञानिक और देवेंद्र नगर गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उषा किरण अग्रवाल के मुताबिक, बुलिंग का बच्चों के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पर सीधा असर पड़ता है। लगातार अपमानित होने या चिढ़ाए जाने से उनमें हीनभावना विकसित हो सकती है।

ऐसे बच्चे धीरे-धीरे कक्षा में सवाल पूछने, मंच पर बोलने और समूह गतिविधियों में हिस्सा लेने से कतराने लगते हैं। इसका असर उनकी निर्णय लेने की क्षमता, नींद और पढ़ाई में एकाग्रता पर भी पड़ सकता है। कुछ बच्चे चिड़चिड़े, गुस्सैल या आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं।

बच्चे के व्यवहार में दिखें ये बदलाव तो रहें सतर्क

अगर बच्चा अचानक स्कूल जाने से मना करने लगे या उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई दे, तो माता-पिता को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये बुलिंग के संभावित संकेत हो सकते हैं।

स्कूल जाने में आनाकानी करना।

अचानक दोस्तों से दूरी बना लेना।

पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों में रुचि कम होना।

नींद और स्वभाव में बदलाव आना।

स्कूल से लौटने पर उदास या डरा हुआ रहना।

अपने सामान के खोने या खराब होने की बार-बार शिकायत करना।

बच्चों की चुप्पी तोड़ना सबसे जरूरी

बुलिंग को रोकने के लिए केवल स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी काफी नहीं है। माता-पिता, शिक्षक और सहपाठियों को भी इस दिशा में संवेदनशील होना होगा। बच्चे की बात को गंभीरता से सुनना, उसे दोषी न ठहराना और शिकायत मिलने पर तुरंत उचित कदम उठाना जरूरी है।

हंसी-मजाक तभी तक ठीक है, जब तक उससे किसी को परेशानी न हो। किसी बच्चे को बार-बार अपमानित करना, डराना या अकेला करना मनोरंजन नहीं, बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला व्यवहार है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को यह समझाया जाए कि मजाक और बुलिंग के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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