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डिग्री हाथ में, नौकरी गायब… नौकरियों की तलाश में भटकती युवा पीढ़ी

क्या बेरोजगारी देश का सबसे बड़ा संकट बनती जा रही है?

रायपुर। देश के लाखों युवा आज एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां उनके हाथ में डिग्री तो है, लेकिन नौकरी नहीं। सालों की मेहनत, लाखों रुपये की फीस और कोचिंग पर खर्च करने के बाद भी रोजगार की गारंटी नहीं मिल रही। यही वजह है कि बेरोजगारी आज देश के सबसे बड़े सामाजिक और आर्थिक मुद्दों में से एक बन चुकी है।

रोजगार के लिए भटक रहे युवा

सुबह नौकरी की वेबसाइटों पर अवसर तलाशने से शुरू होकर दिनभर आवेदन भरने और रात रिजेक्शन के साथ खत्म होने वाली यह कहानी सिर्फ एक युवक की नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं की हकीकत है। बीए, बीकॉम, इंजीनियरिंग, एमबीए और पोस्ट ग्रेजुएशन जैसी डिग्रियां हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं।

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कई सरकारी भर्तियां वर्षों तक अटकी रहती हैं, परीक्षाएं रद्द हो जाती हैं या भर्ती प्रक्रियाओं में देरी होती है। ऐसे में युवा अपनी उम्र और अवसर दोनों खोते जा रहे हैं। वहीं कई लोग अपनी योग्यता से कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं।

वादों से ज्यादा अवसर चाहते है युवा

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सिर्फ नौकरियों की कमी नहीं, बल्कि शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच बढ़ती दूरी भी है। हर साल लाखों छात्र कॉलेजों से निकलते हैं, लेकिन कंपनियां उपयुक्त कौशल वाले उम्मीदवारों की कमी की बात करती हैं।

सरकार रोजगार सृजन और स्किल डेवलपमेंट की दिशा में कई योजनाएं चला रही है, लेकिन युवा अब वादों से ज्यादा अवसर चाहते हैं। उन्हें आंकड़े नहीं, रोजगार चाहिए।

क्योंकि सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के भविष्य का है जो देश की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। अब देखना यह होगा कि युवाओं के हाथों में डिग्री के साथ रोजगार भी कब तक पहुंच पाता है।

 

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