12 साल की सुमना विदा होकर भी दे गई जिंदगियां,अंगदान से दो मरीजों को मिला नया जीवन

रायपुर। रायपुर की 12 वर्षीय सुमना कुंडू भले ही इस दुनिया को अलविदा कह गई हों, लेकिन उनका अंगदान दो जरूरतमंद लोगों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन गया।
दुर्लभ बीमारी से जूझ रही सुमना को 29 मई 2026 को रायपुर स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। लगातार नौ दिनों तक आईसीयू में इलाज और वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
सुमना पिक्नोडाइसोस्टोसिस विद इंट्राक्रेनियल हाइपरटेंशन एंड बाइलेटरल ऑप्टिक एट्रोफी जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। बेटी को खोने के असहनीय दुख के बीच उनके माता-पिता लक्ष्मण कुंडू और सरस्वती कुंडू ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उनकी दोनों किडनी दान करने का साहसिक निर्णय लिया।
अंगदान समन्वयकों द्वारा परिवार को अंगदान के महत्व की जानकारी देने के बाद परिजनों ने समाजहित में यह फैसला लिया। इसके बाद State Organ and Tissue Transplant Organization Chhattisgarh के दिशानिर्देशों के अनुसार किडनी का आवंटन प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को किया गया।
टाटीबंध निवासी किशोर की किडनी प्रत्यारोपित की गई
सुमना की पहली किडनी रायपुर के टाटीबंध निवासी 15 वर्षीय किशोर को प्रत्यारोपित की गई, जो पिछले तीन वर्षों से डायलिसिस पर था।
वहीं दूसरी किडनी 45 वर्षीय एक मरीज को प्रत्यारोपित की गई, जो पिछले पांच वर्षों से किडनी रोग से जूझ रहा था। दोनों प्रत्यारोपण सफल रहे हैं और मरीजों की हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
किडनी प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया डॉक्टरों और विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास से सफलतापूर्वक संपन्न हुई। मानवता के इस महान कार्य के सम्मान में सुमना को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली प्रेरणादायक मिसाल
सुमना की कहानी यह संदेश देती है कि जीवन भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन अंगदान के माध्यम से किसी की उम्मीदें और सांसें आगे बढ़ सकती हैं। उनका यह योगदान समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।

