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फीफा वर्ल्ड कप 2026 बना खेल के साथ राजनीति का भी बड़ा मंच, फाइनल में ट्रंप सबसे ज्यादा चर्चा में रहे

फीफा वर्ल्ड कप 2026 सिर्फ फुटबॉल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस बार यह राजनीति और कूटनीति का भी बड़ा मंच बन गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूरे टूर्नामेंट के दौरान ग्रुप स्टेज से दूर रहे, लेकिन फाइनल मुकाबले में पहुंचकर सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर लीं।

न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए फाइनल में स्पेन ने एक्स्ट्रा टाइम में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर विश्व कप का खिताब जीता। अर्जेंटीना की टीम मैच के दौरान एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद अंत तक संघर्ष करती रही। मुकाबले के बाद ट्रंप ने स्पेन के कप्तान रोड्री को विश्व कप ट्रॉफी सौंपी। इस दौरान स्टेडियम में उनके खिलाफ हूटिंग भी सुनाई दी, लेकिन उन्होंने बिना कोई प्रतिक्रिया दिए ट्रॉफी प्रदान की।

फाइनल मुकाबले में मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, स्पेन के किंग फेलिप षष्ठम और प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ भी मौजूद रहे।

टूर्नामेंट शुरू होने से पहले कई आशंकाएं जताई जा रही थीं कि ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति के कारण दर्शकों की संख्या कम रहेगी और राजनीति खेल पर हावी हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्टेडियम लगभग पूरी क्षमता से भरे रहे और किसी बड़े विरोध प्रदर्शन की स्थिति भी नहीं बनी।

फीफा के अनुसार, पूरे टूर्नामेंट के 104 मैचों में करीब 68 लाख दर्शक स्टेडियम पहुंचे, जो पिछले विश्व कपों की तुलना में अधिक रहे। स्टेडियमों में औसतन 99.7 प्रतिशत सीटें भरी रहीं। टीवी प्रसारण को भी रिकॉर्ड दर्शक मिले।

मैदान पर भी रोमांच देखने को मिला। क्वार्टर फाइनल तक प्रति मैच औसतन 2.94 गोल हुए, जो 1970 के बाद सबसे ज्यादा हैं। लियोनेल मेसी, किलियन एम्बाप्पे और एर्लिंग हालैंड ने सात या उससे अधिक गोल किए, जो विश्व कप इतिहास में पहली बार हुआ।

हालांकि, टूर्नामेंट के दौरान सबसे बड़ा विवाद अमेरिका और बोस्निया के मैच में अमेरिकी खिलाड़ी फोलेरिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड को लेकर हुआ। बाद में फीफा ने रेड कार्ड वापस ले लिया, जिसके बाद कई यूरोपीय देशों और फुटबॉल संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की।

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो भी पूरे टूर्नामेंट के दौरान विवादों में रहे। ट्रंप को शांति पुरस्कार देने और ट्रंप टावर में फीफा कार्यालय खोलने जैसे फैसलों पर कई देशों ने सवाल उठाए।

कुल मिलाकर, फीफा वर्ल्ड कप 2026 ने यह दिखा दिया कि अब फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं रह गया है। बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में राजनीति, कूटनीति और वैश्विक प्रभाव भी अहम भूमिका निभाने लगे हैं।

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