छत्तीसगढ़ के बांधों पर लगेंगे फ्लोटिंग सोलर प्लांट: 2,000 मेगावाट हरित बिजली उत्पादन का लक्ष्य
2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, बैटरी स्टोरेज से चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति होगी संभव

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के 32 बड़े बांधों और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट ( Floating solar plants) स्थापित करने की योजना बनाई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए करीब 2,000 मेगावाट हरित बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए जल संसाधन विभाग को फिजिबिलिटी स्टडी का प्रस्ताव भेजा गया है। अध्ययन पूरा होने के बाद उपयुक्त जलाशयों का चयन कर परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
इस पहल की नींव दुर्ग जिले के मरोदा-1 जलाशय में स्थापित 15 मेगावाट क्षमता वाले राज्य के पहले फ्लोटिंग सोलर प्लांट ( Floating solar plants) की सफलता से पड़ी है। सकारात्मक परिणामों के बाद सरकार अब इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है।
इसके अलावा जांजगीर-चांपा में 6 मेगावाट, कोरबा के पोखरीडीह राखड़ बांध में 27 मेगावाट और हसदेव ताप विद्युत स्टेशन के साइलेंट सागर में 5 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं पर भी काम किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) के अनुसार, पानी की सतह पर विशेष फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। आधुनिक केबल प्रणाली के माध्यम से बिजली सीधे ग्रिड तक पहुंचेगी।
परियोजना में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी विकसित किया जाएगा, जिससे दिन में उत्पादित अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर रात या अधिक मांग के समय उपयोग किया जा सकेगा।
इस योजना ( Floating solar plants) की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए अलग से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी। इससे जलाशयों का बेहतर उपयोग होगा, पानी के वाष्पीकरण में कमी आएगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य की कुल ऊर्जा जरूरतों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

