देश में गोल्ड लोन का जबरदस्त उछाल, 4 साल में NBFCs का कर्ज 208% बढ़ा, डिफॉल्ट दर घटी

देश में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार ने संसद में बताया कि मार्च 2022 से मार्च 2026 के बीच गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) का गोल्ड लोन 1.19 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.66 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी चार साल में इसमें करीब 208 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वहीं, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का गोल्ड लोन भी तेजी से बढ़ा है। मार्च 2023 में बैंकों का बकाया गोल्ड लोन 6.15 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 14.63 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी करीब तीन साल में इसमें 138 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
सरकार के मुताबिक, सोने की बढ़ती कीमतों और आसान कर्ज प्रक्रिया की वजह से गोल्ड लोन आम लोगों, किसानों, छोटे कारोबारियों और MSME के लिए धन जुटाने का भरोसेमंद विकल्प बन गया है। इससे ग्रामीण इलाकों में लोगों की साहूकारों और अनौपचारिक कर्जदाताओं पर निर्भरता भी कम हुई है।
जून 2025 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गोल्ड लोन से जुड़े नियमों को और सख्त किया था। नए नियमों में लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात, सोने के मूल्यांकन और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किया गया, ताकि इस क्षेत्र में पारदर्शिता बनी रहे।
राहत की बात यह है कि गोल्ड लोन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद डिफॉल्ट दर में कमी आई है। बैंकों का गोल्ड लोन GNPA अनुपात मार्च 2023 के 0.19 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 0.12 प्रतिशत रह गया। वहीं, NBFCs का GNPA अनुपात 2.32 प्रतिशत से घटकर 0.81 प्रतिशत पर आ गया।
सरकार ने यह भी बताया कि RBI के पास सोने की नीलामी का राज्यवार या वर्षवार अलग डेटा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कर्जदारों के हितों की सुरक्षा के लिए नीलामी से पहले नोटिस देना, रिजर्व प्राइस तय करना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखना सभी बैंकों और NBFCs के लिए अनिवार्य है।

