रूस से तेल खरीदने पर भारत को बड़ी राहत, ट्रंप ने टैरिफ और प्रतिबंधों में दी छूट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े कई प्रतिबंधों और आयात शुल्कों में छूट देने का फैसला किया है। इस फैसले से भारत और चीन समेत कई देशों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे पहले अमेरिकी कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया था।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी संसद को सूचित किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस तरह की छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन प्रतिबंधों और शुल्कों को छूट के दायरे में रखा गया है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता था भारी टैरिफ
ट्रंप ने सितंबर 2026 में ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून का उद्देश्य रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था। इसके तहत रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले प्रमुख देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 30 दिनों के भीतर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता था।
यह प्रावधान उन देशों पर भी लागू हो सकता था, जो कानून लागू होने के 30 दिन बाद भी जानबूझकर रूस से तेल या गैस खरीदना जारी रखते। इसके अलावा, रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर भी कार्रवाई का प्रावधान था।
भारत समेत कई देशों को मिल सकती है राहत
भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में अमेरिकी कानून के तहत भारी टैरिफ लगाए जाने की आशंका से भारतीय कारोबार पर असर पड़ सकता था। चीन समेत कई अन्य देशों ने भी इस कानून को लेकर चिंता जताई थी।
रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में चीन और भारत के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का नाम भी शामिल है। अमेरिका की ओर से दी गई छूट से इन देशों के व्यापारिक हितों को राहत मिल सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रीय हित का दिया हवाला
ट्रंप ने प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट देने के फैसले के पीछे अमेरिका के राष्ट्रीय हित को प्रमुख कारण बताया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस को लेकर ट्रंप के रुख में नरमी दिखाई दे रही है। वहीं, वह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी कर चुके हैं।
हालांकि, छूट का दायरा स्पष्ट नहीं होने के कारण यह तय करना अभी मुश्किल है कि भारत को इससे कितनी और किस प्रकार की राहत मिलेगी। अमेरिकी प्रशासन की ओर से संबंधित प्रतिबंधों और टैरिफ के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।



