लापता की एफआईआर करने में अब नहीं चलेगा बहाना, आदेश के उल्लंघन पर चीफ सेकेट्री-डीजीपी को कोर्ट में होना पड़ेगा पेश

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि किसी भी व्यक्ति के लापता (missing person) होने की सूचना मिलते ही तुरंत FIR दर्ज की जाए। इसमें उम्र या लिंग के आधार पर कोई भेद नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका यह आदेश सिर्फ लापता बच्चों के मामलों तक सीमित नहीं है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सोमवार को जारी आदेश में कुछ राज्यों की इस व्याख्या पर नाराजगी जताई कि पिछला आदेश केवल बच्चों के लिए था। कोर्ट ने इसे जानबूझकर और गलत नीयत से की गई व्याख्या बताया। बेंच ने कहा कि आदेश में इस्तेमाल किया गया ‘व्यक्ति’ शब्द हर व्यक्ति के लिए है, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।
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आदेश नहीं माना तो चीफ सेक्रेटरी-DGP को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 22 मई के आदेश का पूरी तरह पालन (missing person) नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर हलफनामा देना होगा और बताना होगा कि आदेश की अनदेखी के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
24 घंटे इंतजार करने की जरूरत नहीं
कोर्ट ने पहले दिए निर्देश में कहा था कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस FIR दर्ज करे। परिवार को पहले खुद तलाश करने के लिए कहना या शुरुआती जांच के नाम पर FIR टालना उचित नहीं है। पुलिस को लापता व्यक्ति की तलाश तुरंत शुरू करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट (missing person) ने कहा कि लापता होने के बाद शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यही ‘गोल्डन आवर्स’ होते हैं, जिनमें व्यक्ति को सुरक्षित बरामद करने की संभावना अधिक रहती है। व्यक्ति 24 घंटे के भीतर मिल भी जाए, तब भी पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
कोर्ट ने मानव तस्करी की आशंका वाले मामलों को भी गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं। ठोस कारण मिलने पर ऐसे मामलों को चार महीने का इंतजार किए बिना विशेष यूनिट को सौंपना होगा।



