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हवाई सफर में घटती जा रही यात्रियों की जगह, 40 साल में छोटी हुईं सीटें; भविष्य में खड़े होकर यात्रा का भी कॉन्सेप्ट

पिछले चार दशकों में हवाई यात्रा अधिक सुलभ और किफायती हुई है, लेकिन इसके साथ ही इकोनॉमी क्लास में यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह लगातार कम होती गई है। एयरलाइंस ने विमानों में अधिक यात्रियों को समायोजित करने के लिए सीटों के आकार और उनके बीच की दूरी में लगातार कमी की है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का असर यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

जानकारी के अनुसार, 1980 और 1990 के दशक में इकोनॉमी क्लास में सीट पिच यानी दो सीटों के बीच की दूरी करीब 34 से 35 इंच होती थी, जो अब अधिकांश एयरलाइंस में घटकर 30 से 31 इंच रह गई है। लो-कॉस्ट एयरलाइंस में यह दूरी 28 से 29 इंच तक सिमट चुकी है। इसी तरह सीटों की चौड़ाई भी पहले के मुकाबले कम हो गई है, जबकि इस दौरान यात्रियों की औसत शारीरिक बनावट पहले से बड़ी हुई है।

एयरलाइंस ने पतली और हल्की सीटों का इस्तेमाल बढ़ाया है, जिससे एक ही विमान में पहले की तुलना में अधिक सीटें लगाई जा सकें। उदाहरण के तौर पर, जहां पहले बोइंग 737 विमान में लगभग 120 से 130 सीटें होती थीं, वहीं अब उसी मॉडल में 180 से 190 यात्रियों तक को बैठाने की व्यवस्था की जा रही है। इसी तरह एयरबस A320 में भी सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

वर्तमान में अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटें एयरलाइंस के लिए कमाई का नया जरिया बन चुकी हैं। घरेलू उड़ानों में ऐसी सीटों के लिए यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इसकी कीमत और अधिक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि टिकट का मूल किराया कम रखने के बाद एयरलाइंस आरामदायक सीटों के नाम पर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

सीटों के आकार में कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण व्यावसायिक लाभ माना जा रहा है। विमान निर्माता कंपनियां और एयरलाइंस कम जगह में अधिक यात्रियों को बैठाकर परिचालन लागत कम करने और राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक भरे हुए विमानों में आपात स्थिति के दौरान यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसी बीच भविष्य की हवाई यात्रा को लेकर एक नया कॉन्सेप्ट भी चर्चा में है। इटली की एक कंपनी ने ‘स्टैंडिंग-स्टाइल’ सीट का डिजाइन विकसित किया है, जिसमें यात्री पूरी तरह बैठने के बजाय सहारे के साथ खड़े रहने जैसी स्थिति में यात्रा करेगा। कंपनी का दावा है कि इससे विमान में करीब 20 प्रतिशत अधिक यात्रियों को समायोजित किया जा सकता है। हालांकि अभी तक किसी प्रमुख एयरलाइन ने इस व्यवस्था को व्यावसायिक रूप से लागू नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बजट उड़ानों में इस तरह के प्रयोग देखने को मिल सकते हैं।

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