पहलगाम हमले के बाद PM मोदी का साफ संदेश- आतंकियों को कहीं भी जाकर ढूंढेंगे, डोभाल ने बताया पूरा प्लान

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि हमले के जिम्मेदार लोगों का पीछा किया जाएगा, चाहे वे कहीं भी छिपे हों।
डोभाल ने एक डॉक्युसीरीज में बताया कि पहलगाम हमले के समय प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे। भारत लौटने के बाद एयरपोर्ट पर ही अधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सबसे पहले हमले के जिम्मेदार आतंकियों की पहचान को लेकर जानकारी मांगी। उन्होंने यह जानना चाहा कि हमला किसने किया और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।
पहलगाम हमले के बाद लिया गया बड़ा फैसला
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने आम नागरिकों को निशाना बनाया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अजीत डोभाल ने बताया कि भारतीय खुफिया एजेंसियों ने कम समय में हमले के जिम्मेदार लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई। उन्होंने एजेंसियों के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मदद से हमले के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में तेजी आई।
डोभाल के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य उन आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था, जो पहलगाम हमले से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के मामले में किसी तरह की सीमा बाधा नहीं बन सकती।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर डोभाल ने बताया आगे का रुख
अजीत डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब कहते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है, तो इसका मतलब है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने संकेत दिया कि आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई तब तक चलाने का संकल्प है, जब तक इस खतरे का पूरी तरह मुकाबला नहीं किया जाता।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश केवल तत्काल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं थे, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले अभियान और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की नीति का हिस्सा थे। पहलगाम हमले के बाद भारत की ओर से की गई सैन्य कार्रवाई को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।



