धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव ठुकराया, इस्तीफे की मांग पर अड़ी रही CJP

पेपर लीक मामले को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जंतर-मंतर में चल रहे आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच हुई बातचीत में मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव भी सामने आया था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार CJP ने इस सुझाव को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह केवल मंत्री के इस्तीफे की मांग से ही संतुष्ट होगी।
जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए केंद्र सरकार ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी। दोनों पक्षों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई। तीसरे दौर की बैठक से ठीक पहले धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी।
सूत्रों का दावा है कि वार्ता के दौरान सरकार की ओर से धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का विकल्प रखा गया था। वार्ताकारों का कहना था कि किसी मंत्री का विभाग बदलना या उन्हें पद से हटाना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। लेकिन CJP ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और इस्तीफे की मांग पर कायम रही। बाद में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों की वापसी और नीट पेपर लीक मामले से जुड़े छात्रों की आत्महत्या के मामलों में मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा शामिल था। दूसरे दौर की बातचीत के बाद CJP ने दावा किया था कि सरकार उसकी दो मांगों पर सिद्धांततः सहमत है, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई थी।
केंद्रीय मंत्रियों और CJP प्रतिनिधियों के बीच दिल्ली के विट्ठलभाई पटेल भवन में करीब दो घंटे तक बैठक चली। CJP ने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी। वहीं CJP ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित बर्बरता को लेकर केंद्र सरकार, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस से सार्वजनिक माफी की भी मांग की है।

