Chhattisgarh

बिलासपुर में किताबों के इंतजार में छात्र, नया सत्र शुरू होने के बाद भी स्कूलों तक नहीं पहुंचीं पाठ्य पुस्तकें

नया शिक्षा सत्र शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बिलासपुर जिले के कई स्कूलों में छात्रों को अब तक पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। स्कूलों में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन हजारों विद्यार्थी बिना किताबों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इससे पढ़ाई की गति प्रभावित हो रही है और छात्रों को पुरानी पुस्तकों, नोट्स तथा शिक्षकों के मौखिक मार्गदर्शन के सहारे अध्ययन करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, पाठ्य पुस्तकों की छपाई और वितरण में देरी के पीछे 70 और 80 जीएसएम कागज को लेकर उत्पन्न तकनीकी और प्रशासनिक विवाद प्रमुख कारण माना जा रहा है। नई शैक्षणिक पुस्तकों के प्रकाशन में राष्ट्रीय स्तर पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप बदलाव किए गए, जिसके चलते टेंडर प्रक्रिया और छपाई का कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका।

बिलासपुर जिले में करीब तीन लाख छात्रों के लिए लगभग 15 लाख पुस्तकों की आवश्यकता है। राज्य सरकार की योजना के तहत कक्षा पहली से दसवीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि इस वर्ष वितरण प्रक्रिया में देरी होने से कई स्कूलों में छात्रों को पूरी पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं।

अभिभावकों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग को नए सत्र के शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए थीं। उनका कहना है कि किताबों की अनुपलब्धता से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, विशेषकर ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के बच्चों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

किताबों की छपाई में देरी के पीछे कागज की गुणवत्ता को लेकर चला विवाद भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। पहले पुस्तकों की छपाई 70 जीएसएम कागज पर होती थी, जबकि इस बार 80 जीएसएम कागज के उपयोग का प्रस्ताव रखा गया था। बाद में पुस्तकों के बढ़ते वजन और छात्रों के बस्तों पर अतिरिक्त बोझ की आशंका के चलते प्रस्ताव में संशोधन करना पड़ा, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।

जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ने बताया कि नई पाठ्य पुस्तकें प्राप्त हो चुकी हैं और उनका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों सहित अन्य संस्थानों में भी अगले कुछ दिनों में किताबें पहुंचा दी जाएंगी, जिसके बाद विद्यार्थियों को नियमित रूप से पाठ्य सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।

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