यूपी में राशन वितरण पर संकट! कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर कोटेदारों ने दी हड़ताल की चेतावनी

उत्तर प्रदेश के राशन कोटेदारों ने कमीशन बढ़ाने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लखनऊ में प्रदर्शन के बाद कोटेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो अगस्त महीने में पूरे प्रदेश में राशन वितरण बंद कर दिया जाएगा।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में कोटेदारों को राशन वितरण पर 90 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है। उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। उनका कहना है कि हरियाणा, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में इससे अधिक कमीशन दिया जाता है।
कोटेदारों की कमाई कैसे होती है?
कोटेदारों को वेतन नहीं मिलता। उनकी आय मुख्य रूप से राशन वितरण पर मिलने वाले कमीशन पर निर्भर करती है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत प्रति क्विंटल अनाज वितरण पर राज्यों को वित्तीय सहायता देती है, जबकि अतिरिक्त कमीशन या मानदेय देना राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में कोटेदारों की आय अलग-अलग होती है।
किस राज्य में कितना मिलता है कमीशन?
- उत्तर प्रदेश: ₹90 प्रति क्विंटल
- बिहार: ₹258.40 प्रति क्विंटल
- महाराष्ट्र: ₹170 प्रति क्विंटल
- राजस्थान: ₹150.70 प्रति क्विंटल
- मध्य प्रदेश: ₹70 प्रति क्विंटल
- छत्तीसगढ़: ₹120 प्रति क्विंटल
औसतन कितनी होती है कमाई?
राशन दुकान से जुड़े लाभार्थियों की संख्या के आधार पर कोटेदारों की मासिक आय अलग-अलग होती है।
- छोटे गांवों की दुकानों में: ₹8,000–15,000 प्रति माह
- मध्यम आकार की दुकानों में: ₹15,000–30,000 प्रति माह
- बड़े केंद्रों पर: ₹40,000–50,000 प्रति माह
हालांकि, कोटेदारों का कहना है कि किराया, बिजली, परिवहन, कर्मचारियों का खर्च और अन्य संचालन लागत निकालने के बाद वास्तविक बचत काफी कम रह जाती है।
लंबे समय से क्या हैं मांगें?
कोटेदार लंबे समय से निम्न मांगें उठा रहे हैं-
- कमीशन में बढ़ोतरी
- ₹30,000–50,000 मासिक मानदेय
- सरकारी कर्मचारी का दर्जा
- पेंशन और स्वास्थ्य बीमा
- दुर्घटना बीमा
- परिवहन खर्च की प्रतिपूर्ति
- समय पर भुगतान
उनका कहना है कि मुफ्त राशन योजना के विस्तार के साथ उनका कार्यभार बढ़ा है, लेकिन कमीशन में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई।
हर राज्य में कमीशन अलग क्यों है?
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त व्यवस्था है। केंद्र सरकार खाद्यान्न उपलब्ध कराती है और न्यूनतम वित्तीय सहायता तय करती है, जबकि राशन दुकानों का संचालन, अतिरिक्त कमीशन, मानदेय और अन्य सुविधाओं का निर्णय राज्य सरकारें अपने बजट और नीतियों के अनुसार करती हैं। इसी कारण देशभर में कोटेदारों को मिलने वाला कमीशन और सुविधाएं अलग-अलग हैं।

