रूस की वॉर इकोनॉमी पर बढ़ा दबाव, बैंकों से अरबों डॉलर की निकासी से चिंता

मॉस्को। रूस की वॉर इकोनॉमी पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। बैंकों से बड़ी मात्रा में पैसा निकाले जाने, कारोबार की पूंजी विदेश जाने, बढ़ते बजट घाटे और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच लोगों और कारोबारियों का भरोसा कमजोर होने की खबरें सामने आ रही हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के पहले दो हफ्तों में रूसी बैंक खातों से करीब 3.4 अरब डॉलर यानी 286.4 अरब रूबल निकाले गए। इससे पहले जून और जुलाई में करीब 11.8 अरब डॉलर की निकासी हुई थी। इस तरह जून से 14 अगस्त के बीच कुल निकासी करीब 15.2 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
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2022 के बाद बड़ी निकासी की आशंका
रूस के सबसे बड़े बैंक स्बेरबैंक के वरिष्ठ अधिकारी तारास स्क्वॉर्त्सोव के मुताबिक, 2026 में रूस से होने वाला कुल पूंजी पलायन 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद आई शुरुआती बड़ी निकासी की लहर से करीब दोगुना हो सकता है।
रूसी केंद्रीय बैंक ने भी जून में बैंकों से नकदी की बढ़ती मांग का जिक्र किया था। हालांकि, बैंक से नकदी निकालना और पूंजी को देश से बाहर ले जाना अलग-अलग घटनाएं हैं। लेकिन जब दोनों एक साथ बढ़ते हैं, तो बैंकिंग सिस्टम और सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।
लोग बैंक में पैसा रखने से क्यों डर रहे हैं?
रूस में निजी बचत को लेकर चिंता बढ़ने के पीछे युद्ध के लंबा खिंचने और सरकार की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। जून में कम्युनिस्ट पार्टी के नेता गेन्नाडी ज्युगानोव ने अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्त को सहारा देने के लिए लोगों और कंपनियों के बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के इस्तेमाल की बात कही थी।
हालांकि यह सरकारी नीति या बैंक जमा जब्त करने का फैसला नहीं था, लेकिन इस तरह की सार्वजनिक चर्चा ने लोगों के बीच निजी बचत को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं।
यूक्रेनी हमलों का भी असर
रूस के अंदर बढ़ते यूक्रेनी ड्रोन हमले भी कारोबारी गतिविधियों और लोगों के भरोसे को प्रभावित कर रहे हैं। अब हमलों का दायरा सैन्य ठिकानों के साथ-साथ ऊर्जा, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स ढांचे तक पहुंच रहा है।
16 अगस्त को मॉस्को क्षेत्र के पोडॉल्स्क में रूस की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी वाइल्डबेरीज के एक बड़े वेयरहाउस पर हमला हुआ। रूस के मुताबिक, इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। ऐसे हमलों से सप्लाई चेन, डिलीवरी नेटवर्क, कारोबारियों और बीमा क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है।
बैंकों पर भी बढ़ रहा दबाव
रूसी बैंक युद्ध के दौरान कंपनियों और अर्थव्यवस्था को कर्ज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जून में बैंकों का कॉरपोरेट लेंडिंग पोर्टफोलियो 0.4 प्रतिशत बढ़ा और सालाना आधार पर इसकी वृद्धि करीब 13.7 प्रतिशत रही।
ऐसे में अगर ग्राहक अचानक बड़ी मात्रा में पैसा निकालने लगते हैं, तो बैंकों को अपनी नकदी और तरलता बनाए रखने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के अंत में स्बेरबैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि रूसी बैंकों के पास सरकार के बजट घाटे को पूरा करने के लिए जारी किए जाने वाले सरकारी बॉन्ड खरीदने के लिए अतिरिक्त रूबल लिक्विडिटी नहीं बची है।
बढ़ता बजट घाटा सरकार की चिंता बढ़ा रहा
रूस का संघीय बजट भी दबाव में है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच बजट घाटा 6.455 ट्रिलियन रूबल तक पहुंच गया, जो सकल घरेलू उत्पाद का करीब 2.8 प्रतिशत है। वहीं, पूरे 2026 के लिए शुरुआती लक्ष्य 3.786 ट्रिलियन रूबल यानी जीडीपी का 1.6 प्रतिशत घाटा रखा गया था।
सरकार बजट घाटे की भरपाई के लिए सरकारी बॉन्ड जारी करती है। लेकिन अगर बैंकों के पास अतिरिक्त नकदी कम हो और निवेशकों की मांग कमजोर पड़े, तो घरेलू बाजार से पैसा जुटाना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है।
लंबी जंग ने बढ़ाई आर्थिक चुनौती
रूस की अर्थव्यवस्था पर एक साथ कई मोर्चों से दबाव बन रहा है। बैंकिंग सिस्टम से बड़ी मात्रा में नकदी निकल रही है, कारोबार की पूंजी विदेश जा रही है, बजट घाटा बढ़ रहा है और यूक्रेनी हमलों से देश के भीतर औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स ढांचे पर असर पड़ रहा है।
इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि रूस की वॉर इकोनॉमी पर वित्तीय और भरोसे से जुड़ा दबाव बढ़ रहा है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है और यह दबाव जारी रहता है, तो क्रेमलिन के सामने युद्ध का खर्च जुटाने के लिए टैक्स बढ़ाने, सरकारी खर्च में कटौती, ज्यादा कर्ज लेने या निजी क्षेत्र से अतिरिक्त संसाधन जुटाने जैसे मुश्किल विकल्प बढ़ सकते हैं।



