कोरबा में 299 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट पर बारिश का ब्रेक, हसदेव में बाढ़ से पाइपलाइन का काम ठप

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर को सीवरेज और जल प्रदूषण की समस्या से राहत दिलाने के लिए शुरू की गई करीब 299 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सीवरेज परियोजना पर फिलहाल मानसून का असर पड़ गया है। लगातार बारिश और हसदेव नदी में बढ़े जलस्तर के कारण नदी के ऊपर से सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के लिए किए जा रहे निर्माण कार्य को रोकना पड़ा है। नदी में तेज बहाव के चलते पाइपलाइन के लिए कॉलम तैयार करने का काम फिलहाल बंद है।
हालांकि परियोजना के दूसरे हिस्से में काम जारी है। प्रगति नगर क्षेत्र में बन रहे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के आधारभूत ढांचे पर बारिश के बावजूद निर्माण कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक एसटीपी का करीब 50 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
हसदेव नदी में बढ़ा जलस्तर, रोकना पड़ा निर्माण
कोरबा की इस सीवरेज परियोजना का एक अहम हिस्सा हसदेव नदी के ऊपर से सीवरेज पाइपलाइन ले जाना है। इसके लिए नदी क्षेत्र में कॉलम तैयार किए जा रहे थे, लेकिन लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। तेज बहाव और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए निर्माण कार्य रोकना पड़ा।
नदी के बीच या आसपास निर्माण कार्य करना इस स्थिति में जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में मानसून के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल काम रोक दिया गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि बारिश कम होने और हसदेव नदी का जलस्तर सामान्य होने के बाद पाइपलाइन नेटवर्क का काम फिर से गति पकड़ सकेगा।
दूसरी तरफ प्रगति नगर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण जारी है। यानी परियोजना पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि जिन हिस्सों में मौसम की वजह से काम प्रभावित हो रहा है, वहां निर्माण रोककर दूसरे हिस्सों में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
88.50 करोड़ के STP का 50 फीसदी काम पूरा
परियोजना के तहत प्रगति नगर क्षेत्र में करीब 88.50 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस प्लांट का लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
इस प्लांट का उद्देश्य शहर से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना है। वर्तमान में शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाला सीवरेज नालों के जरिए हसदेव नदी तक पहुंचता है। परियोजना पूरी होने के बाद इस पानी को सीधे नदी में जाने से रोककर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।
हर दिन 80 एमएलडी गंदे पानी का होगा उपचार
पूरी सीवरेज परियोजना का लक्ष्य प्रतिदिन करीब 80 एमएलडी यानी 80 मिलियन लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना है।
एसटीपी में सीवरेज पानी को अलग-अलग चरणों से गुजारा जाएगा। इस प्रक्रिया में पानी में मौजूद ठोस अपशिष्ट, कार्बनिक पदार्थ और अन्य प्रदूषकों को हटाने का काम किया जाएगा। उपचार के बाद पानी को निर्धारित मानकों के अनुसार उपयोग या आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।
इससे सबसे बड़ा फायदा हसदेव नदी को होने की उम्मीद है। बिना उपचारित सीवरेज पानी की सीधी एंट्री कम होने से नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
211 करोड़ का TTP भी तैयार होगा
सीवरेज परियोजना में एसटीपी के साथ टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट यानी TTP भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी प्रस्तावित लागत करीब 211 करोड़ रुपये है। अधिकारियों के अनुसार इसके निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
मानसून के बाद टीटीपी का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। टीटीपी में एसटीपी से उपचारित पानी को और बेहतर तरीके से शुद्ध किया जाएगा, ताकि उसे औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सके।
इससे उद्योगों को ताजे पानी पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर कोरबा जैसे औद्योगिक शहर में इसका बड़ा फायदा होने की उम्मीद है, जहां ताप विद्युत संयंत्रों समेत कई उद्योगों को बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है।
उद्योगों को मिलेगा करीब 38 एमएलडी उपचारित पानी
परियोजना पूरी होने के बाद करीब 38 एमएलडी उपचारित सीवरेज पानी औद्योगिक उपयोग में लाने की योजना है। इस पानी का इस्तेमाल ताप विद्युत संयंत्रों और अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का सीधा असर ताजे पानी की मांग पर पड़ेगा। यदि उद्योगों को उपचारित सीवरेज पानी उपलब्ध कराया जाता है तो उन्हें ताजे पानी के स्रोतों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।
बांगो जलाशय के पानी की होगी बचत
परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जल संरक्षण भी है। उद्योगों में उपचारित सीवरेज पानी का इस्तेमाल होने से बांगो जलाशय से लिए जाने वाले ताजे पानी की मात्रा कम होने की संभावना है।
इससे जलाशय के पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। बचाए गए पानी का उपयोग सिंचाई और अन्य जरूरी कार्यों में किया जा सकेगा। खासकर गर्मी के मौसम में जब पानी की मांग और दबाव बढ़ जाता है, तब यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
खेती और मत्स्य पालन को भी फायदा मिलने की उम्मीद
बांगो जलाशय में ताजे पानी की उपलब्धता बेहतर रहने से इसका लाभ कृषि क्षेत्र को भी मिल सकता है। सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहने से किसानों को खरीफ के साथ अन्य मौसम में भी खेती करने का अवसर मिल सकता है।
इसके अलावा जलाशय में पर्याप्त पानी रहने से मत्स्य पालन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। जलस्तर बेहतर रहने पर मछली पालन से जुड़े स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर बढ़ सकते हैं।
हालांकि इन लाभों का वास्तविक असर परियोजना पूरी तरह लागू होने और जल प्रबंधन व्यवस्था के प्रभावी संचालन के बाद ही स्पष्ट होगा।
पर्यटन को भी मिल सकता है फायदा
बांगो जलाशय कोरबा के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में शामिल है। जलाशय में पानी की बेहतर उपलब्धता रहने से भविष्य में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
यदि जलाशय का जलस्तर बेहतर बना रहता है तो आसपास पर्यटन आधारित गतिविधियों के विस्तार की संभावना बढ़ सकती है। इससे स्थानीय दुकानदारों, परिवहन से जुड़े लोगों और अन्य सेवा प्रदाताओं को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है।
हसदेव नदी के प्रदूषण पर लगेगी रोक
कोरबा की सीवरेज परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य हसदेव नदी में बिना उपचारित गंदे पानी के प्रवाह को रोकना है।
वर्तमान में शहर के कई हिस्सों से निकलने वाला सीवरेज नालों के जरिए नदी तक पहुंचता है। इससे नदी की जल गुणवत्ता प्रभावित होती है और पर्यावरण पर भी इसका असर पड़ता है।
परियोजना के पूरी तरह लागू होने के बाद सीवरेज नेटवर्क के जरिए गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। वहां उपचार के बाद पानी को निर्धारित उपयोग में लाने की योजना है। इससे नदी में प्रदूषित पानी के सीधे प्रवाह को कम करने में मदद मिल सकती है।
बारिश थमने के बाद फिर बढ़ेगी काम की रफ्तार
नगर निगम के कार्यपालन अभियंता राकेश मसीह के अनुसार लगातार बारिश और हसदेव नदी में बढ़े जलस्तर के कारण नदी क्षेत्र में पाइपलाइन के लिए कॉलम बनाने का काम फिलहाल बंद है। हालांकि प्रगति नगर स्थित ट्रीटमेंट प्लांट के आधारभूत ढांचे का काम जारी है।
टीटीपी के टेंडर की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में बताई जा रही है। मानसून के बाद इसके निर्माण में भी तेजी आने की उम्मीद है।
इस तरह करीब 299 करोड़ रुपये की यह परियोजना फिलहाल मौसम की चुनौती से जूझ रही है। नदी का जलस्तर सामान्य होने के बाद पाइपलाइन नेटवर्क का काम दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने के बाद कोरबा को सीवरेज प्रबंधन, हसदेव नदी के संरक्षण, औद्योगिक जल आपूर्ति और जल बचत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है।
फैक्ट फाइल
- कुल परियोजना लागत: करीब 299 करोड़ रुपये
- STP लागत: 88.50 करोड़ रुपये
- TTP प्रस्तावित लागत: 211 करोड़ रुपये
- सीवरेज शोधन क्षमता: 80 एमएलडी प्रतिदिन
- औद्योगिक उपयोग के लिए उपचारित पानी: करीब 38 एमएलडी
- STP का काम: करीब 50 प्रतिशत पूरा
- वर्तमान बाधा: हसदेव नदी में बढ़ा जलस्तर और लगातार बारिश
- मुख्य उद्देश्य: सीवरेज जल का वैज्ञानिक उपचार और पुन: उपयोग
- प्रमुख लाभ: हसदेव नदी प्रदूषण में कमी, ताजे पानी की बचत और औद्योगिक जल जरूरतों में कमी



