ईरान में सत्ता संघर्ष के संकेत तेज, खामेनेई परिवार से जुड़े धर्मगुरु के दावों ने बढ़ाई हलचल

ईरान में सत्ता के भीतर संभावित संघर्ष और नेतृत्व को लेकर बहस तेज होती दिख रही है। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के परिवार से रिश्तेदारी रखने वाले प्रभावशाली धर्मगुरु मोहम्मद बाकर खर्राजी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उन्होंने मौजूदा इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था को बदलकर “इस्लामी सरकार” स्थापित करने की योजना का दावा किया है।
करीब पांच मिनट के इस वीडियो में खर्राजी ने कथित तौर पर वर्षों पहले एक “छाया सरकार” तैयार करने का दावा किया। उनके मुताबिक, इस संगठन के पास शासन व्यवस्था के लिए 60 खंडों वाली विस्तृत योजना है। इसमें सरकारी संस्थाओं के संचालन से लेकर नई व्यवस्था लागू करने तक का खाका शामिल है।
ढाई लाख समर्थकों का नेटवर्क बनाने का दावा
खर्राजी ने संगठन के विस्तार के लिए समर्थकों से हर व्यक्ति को 17 नए लोगों को जोड़ने का लक्ष्य दिया। उन्होंने दावा किया कि इस मॉडल के जरिए एक हजार शहरों में करीब ढाई लाख लोगों का नेटवर्क तैयार किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर एक लाख लोगों की रैली आयोजित की जा सकती है और उनका संगठन मंत्रालयों तक दबाव बनाने में सक्षम होगा।
खामेनेई के बेटे को लेकर भी बड़ा दावा
वीडियो में खर्राजी ने अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को लेकर भी दावा किया। उन्होंने कहा कि मोजतबा की सोच उनके पिता से भी अधिक कट्टरपंथी है और वह लंबे समय से उनके संपर्क में रहे हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और ईरानी सरकार की ओर से भी इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कौन हैं मोहम्मद बाकर खर्राजी?
65 वर्षीय मोहम्मद बाकर खर्राजी ईरान के प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके परिवार के कई सदस्य ईरान के धार्मिक और राजनीतिक सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े रहे हैं। इसी वजह से उनके हालिया बयानों को सामान्य राजनीतिक बयानबाजी के बजाय सत्ता के भीतर संभावित खींचतान के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों के बीच इस वीडियो को लेकर अलग-अलग संभावनाएं जताई जा रही हैं। कुछ का मानना है कि ईरानी सत्ता उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, जबकि कुछ इसे सत्ता के भीतर बढ़ते शक्ति संघर्ष और संभावित नेतृत्व परिवर्तन के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि वीडियो में किए गए कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन बयानों ने ईरान के भीतर वैचारिक संघर्ष और नेतृत्व को लेकर बढ़ती अनिश्चितता पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।



