लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक का मार्च, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर पैदल चलने का ऐलान

लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा में मारे गए लोगों की पहली बरसी पर 24 सितंबर को ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इससे एक दिन पहले 23 सितंबर को सोनम वांगचुक के नेतृत्व में 20 किलोमीटर का मार्च निकाला जाएगा। इस कार्यक्रम के जरिए मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने की मांग उठाई जाएगी।
मुआवजे और मुकदमे वापस लेने की मांग
मृतकों के परिवारों के लिए उचित मुआवजा और दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। सोनम वांगचुक के कार्यालय की ओर से बताया गया कि 24 सितंबर को पिछले साल हुई मौतों की पहली बरसी पर कार्यक्रम होगा। इसके पहले 23 सितंबर को मार्च निकाला जाएगा।
लद्दाख प्रशासन ने हिंसा में मारे गए चार लोगों के परिवारों को 15-15 लाख रुपये और घायलों को 3-3 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। हालांकि, वांगचुक ने इस राशि पर असंतोष जताते हुए इसे अपर्याप्त बताया है।
केंद्र के साथ बैठक में नहीं बनी बात
लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय गृह मंत्रालय की उप-समिति के साथ हाल ही में बैठक हुई थी। बैठक में लद्दाख के नेताओं ने चुनी हुई संस्था से जुड़े प्रस्ताव पर स्पष्ट लिखित योजना की मांग की थी। प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक मई के बाद से इस मामले में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई है।
10 सितंबर को एक सोशल मीडिया पोस्ट में वांगचुक ने कहा था कि बैठक का प्रमुख नतीजा अगली बैठक की तारीख तय होना रहा। इसके बाद वांगचुक और लद्दाख के अन्य नेताओं ने 19 से 24 सितंबर तक आंदोलन की चेतावनी दी थी, लेकिन मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए उस आंदोलन को टाल दिया गया।
हिंसा के बाद वांगचुक हिरासत में भी रहे
लद्दाख में हुई हिंसा के मामले में सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत छह महीने तक हिरासत में रखा गया था। अब पहली बरसी के मौके पर प्रस्तावित मार्च और ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम के जरिए मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे और मामलों की वापसी समेत अन्य मांगों को फिर से उठाया जाएगा।


