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TMC में ‘असली-नकली’ की लड़ाई तेज:

बागी सांसदों का बड़ा दावा, सोमवार को लोकसभा स्पीकर से करेंगे मुलाकात

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी में बढ़ती अंदरूनी कलह के बीच ममता बनर्जी के बागी सांसदों ने खुद को “असली टीएमसी” बताते हुए लोकसभा में अलग संसदीय समूह के तौर पर मान्यता की मांग करने की तैयारी कर ली है। इस मुद्दे ने न केवल पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है।

बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व कर रहे सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि उनके साथ बड़ी संख्या में सांसद हैं और वे सोमवार को लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे। उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही स्पीकर को पत्र सौंप दिया है और अब वे आधिकारिक रूप से अपने समूह को “असली टीएमसी संसदीय दल” के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे।

19 सांसदों के समर्थन का दावा

जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि 19 लोकसभा सांसदों ने उनके ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। उनके मुताबिक, समर्थन जुटाने की प्रक्रिया 8 जून से शुरू हुई थी और अब उन्हें पर्याप्त संख्या में सांसदों का समर्थन मिल चुका है।

हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा स्पीकर के साथ प्रस्तावित बैठक का समय भी अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुआ है। वहीं, 19 सांसदों के नाम और हस्ताक्षर वाली सूची सामने आने की बात कही जा रही है, लेकिन स्पीकर को भेजे गए पत्र को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ममता बनर्जी के लिए बढ़ी चुनौती

TMC के भीतर बढ़ती बगावत को पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। TMC पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया था कि कुछ ताकतें सांसदों को पार्टी छोड़ने और पाला बदलने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

हालांकि, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह निराधार है और सांसद अपनी इच्छा से निर्णय ले रहे हैं। उनके अनुसार, “हम 19 सांसद हैं और हमारी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसी भी असहमति को साजिश बताना उचित नहीं है।”

चुनावी हार के बाद बढ़ा असंतोष

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में TMC को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। चुनावी झटके के बाद कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।

हाल के दिनों में अभिनेत्री और सांसद कोयल मल्लिक तथा प्रकाश चिक बारिक ने TMC पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे प्रमुख नेताओं के इस्तीफों ने भी TMC पार्टी को कमजोर किया था।

संसद में दिख सकता है असर

यदि बागी सांसदों का समूह लोकसभा स्पीकर के सामने पर्याप्त समर्थन साबित करने में सफल रहता है, तो टीएमसी के संसदीय दल में बड़ा विभाजन देखने को मिल सकता है। इसका असर न केवल संसद में पार्टी की ताकत पर पड़ेगा, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी नए समीकरण बन सकते हैं।

फिलहाल सबकी नजर सोमवार को होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा स्पीकर बागी सांसदों के दावे पर क्या रुख अपनाते हैं और टीएमसी के भीतर चल रही यह राजनीतिक खींचतान आगे किस दिशा में जाती है।

 

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Shruti Jangde

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