‘मुसलमान सिर्फ अल्लाह में यकीन रखता है’, ‘वंदे मातरम’ विवाद पर मौलाना यासूब अब्बास का बयान

नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी और शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय इसके भाव और संदर्भ को समझने की जरूरत है।
मौलाना यासूब अब्बास ने मुस्लिम आस्था और देशभक्ति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक मुसलमान सिर्फ अल्लाह में विश्वास रखता है और उसी के सामने सजदा करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने देश से प्रेम नहीं करता। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम करना भी ईमान का हिस्सा है।
‘वंदे मातरम’ विवाद का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे को धर्म और राजनीति के विवाद में बदलने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी विषय पर चर्चा करते समय उसके मूल भाव और संदर्भ को समझना जरूरी है।
उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के अर्थ का जिक्र करते हुए कहा कि इसका भाव ‘हे मां, हम आपको नमन करते हैं’ है। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर अलग-अलग लोगों की धार्मिक मान्यताएं हो सकती हैं, लेकिन इसे राजनीतिक टकराव का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
‘मुसलमान सिर्फ अल्लाह में विश्वास रखता है’
शिया धर्मगुरु ने मुस्लिम आस्था को लेकर अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि मुसलमान सिर्फ अल्लाह में विश्वास रखता है और उसी के सामने सजदा करता है। साथ ही उन्होंने देशप्रेम को लेकर कहा कि देश से प्रेम करना भी ईमान का हिस्सा है।
उनके इस बयान को ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही बहस के बीच एक संतुलित प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने धार्मिक आस्था और देशभक्ति के बीच अंतर को समझने की जरूरत पर जोर दिया।
कैसे शुरू हुआ ‘वंदे मातरम’ विवाद?
दरअसल, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया था। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच बातचीत और इशारों को लेकर बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाए। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम’ का गायन रोकने के लिए खरगे से कहा था।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की ओर से अलग स्पष्टीकरण दिया गया है। इसलिए वीडियो के संदर्भ और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है।
अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वंदे मातरम विवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान शाह ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर निशाना साधा।
अमित शाह ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का यह गीत लंबे समय बाद फिर से सम्मान हासिल कर रहा है, लेकिन कांग्रेस की ओर से इसे लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है और कांग्रेस को इस मामले में जनता से माफी मांगनी चाहिए।
‘वंदे मातरम’ पर राजनीतिक बयानबाजी तेज
‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत है। इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
मौलाना यासूब अब्बास ने अपने बयान के जरिए इस विवाद को धार्मिक टकराव के बजाय समझ और संवाद के नजरिए से देखने की अपील की है। उन्होंने मुस्लिम आस्था का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि धार्मिक विश्वास और देश के प्रति प्रेम को एक-दूसरे के विरोध में नहीं देखा जाना चाहिए।
विवाद में अब धर्मगुरु की प्रतिक्रिया भी चर्चा में
राजनीतिक नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी के बीच मौलाना यासूब अब्बास की प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर मुस्लिम आस्था और देशप्रेम दोनों विषयों पर बात की है।
उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक समुदाय की आस्था को समझे बिना राजनीतिक बहस को आगे बढ़ाने से समाज में गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में संयम और संवाद जरूरी है।
आस्था और देशभक्ति को लेकर क्या बोले मौलाना?
मौलाना यासूब अब्बास की प्रतिक्रिया का मुख्य संदेश यही रहा कि धार्मिक आस्था और देशभक्ति को आमने-सामने खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों की धार्मिक मान्यता का जिक्र करते हुए कहा कि मुसलमान अल्लाह में विश्वास रखता है, लेकिन अपने देश से प्रेम करना भी उसके ईमान का हिस्सा है।
फिलहाल ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।



