सरकार ने साफ किया रुख, अब नहीं मिलेगा बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल

केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में अब बिना एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल (E0) या 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाला E10 पेट्रोल दोबारा लागू करने की कोई योजना नहीं है। संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार की नीति बेहतर और आधुनिक ईंधन तकनीक को बढ़ावा देने की है, इसलिए E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) व्यवस्था को ही आगे जारी रखा जाएगा।
सरकार के अनुसार भारत ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित समय से पांच साल पहले ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। वर्ष 2022-23 में औसत एथेनॉल मिश्रण करीब 12 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 14.6 प्रतिशत, 2024-25 में 19.2 प्रतिशत और 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया। फिलहाल 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं E85 ईंधन केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ही उपलब्ध रहेगा।
सरकार ने E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान होने की आशंकाओं को भी खारिज किया है। सरकार ने बताया कि नीति आयोग, इंडियन ऑयल, एआरएआई, आईआईपी और सियाम सहित विभिन्न संस्थानों द्वारा किए गए परीक्षणों और वास्तविक उपयोग के आंकड़ों में E20 से इंजन को किसी असामान्य क्षति के प्रमाण नहीं मिले हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग में भी एथेनॉल के कारण इंजन खराब होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।
माइलेज को लेकर सरकार ने कहा कि पुराने E10 तकनीक वाले वाहनों में E20 के उपयोग से अधिकतम 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज में मामूली कमी आ सकती है। हालांकि E20 का ऑक्टेन स्तर अधिक होने से वाहन का पिकअप, इंजन की कार्यक्षमता और ड्राइविंग अनुभव बेहतर होता है।
सरकार ने एथेनॉल मिश्रण से होने वाले आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ भी गिनाए। इसके अनुसार अब तक करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है और करीब 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटा है। साथ ही किसानों को एथेनॉल उत्पादन के लिए 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
सरकार ने बताया कि E20 ईंधन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने शिकायत पुस्तिका, टोल-फ्री हेल्पलाइन, वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया और सीपीग्राम्स पोर्टल सहित विभिन्न माध्यम उपलब्ध कराए हैं, जहां उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

