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अमेरिकी AI मॉडल्स से सैन्य तकनीक विकसित कर रहा चीन? रिपोर्ट में बड़ा दावा, AI की जंग में नया मोर्चा

नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रतिस्पर्धा अब सैन्य तकनीक तक पहुंच गई है। वाशिंगटन स्थित जेम्सटाउन फाउंडेशन और रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और उससे जुड़े रक्षा संस्थान अमेरिकी AI मॉडल्स की क्षमताओं का इस्तेमाल कर अपने छोटे और सुरक्षित सैन्य AI सिस्टम विकसित कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद दोनों देशों के बीच तकनीकी और बौद्धिक संपदा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

क्या है मॉडल डिस्टिलेशन तकनीक?

रिपोर्ट के अनुसार, चीन मॉडल डिस्टिलेशन तकनीक का उपयोग कर रहा है। इसमें बड़े और शक्तिशाली AI मॉडल्स के आउटपुट का उपयोग करके छोटे और हल्के AI मॉडल तैयार किए जाते हैं। ऐसे मॉडल कम कंप्यूटिंग क्षमता में भी काम कर सकते हैं और इन्हें स्थानीय या बंद नेटवर्क पर आसानी से तैनात किया जा सकता है।

सैन्य रिसर्च में अमेरिकी AI का इस्तेमाल

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी सैन्य शोध संस्थान अमेरिकी AI मॉडल्स की तर्क क्षमता (रीजनिंग) का अध्ययन कर उसे अपने रक्षा सिस्टम में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इन तकनीकों का उपयोग साइबर सुरक्षा, निगरानी, ड्रोन संचालन और युद्धक्षेत्र में रणनीतिक निर्णय लेने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।

रिपोर्ट में बताए गए प्रमुख दावे

  • PLA की यूनिट 96941 ने कथित तौर पर संवेदनशील सैन्य कोड का विश्लेषण करने के लिए GPT-3.5 का उपयोग किया और उसके आधार पर घरेलू AI मॉडल तैयार किया।
  • नॉर्थ यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और कंटेंट विश्लेषण के लिए क्लॉड 3 हाइकू मॉडल के आउटपुट का उपयोग किया।
  • नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी ने मॉडल डिस्टिलेशन के जरिए ऐसा हल्का AI मॉडल विकसित करने का दावा किया, जिसे ड्रोन में लगाया जा सके।
  • एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंसेज ने समुद्री अभियानों में लक्ष्य पहचानने वाले AI सिस्टम के विकास में इस तकनीक के इस्तेमाल का उल्लेख किया है।

अमेरिका ने जताई आपत्ति

अमेरिका का आरोप है कि चीन बिना अनुमति अमेरिकी AI मॉडल्स की क्षमताओं का उपयोग कर अपने सिस्टम विकसित कर रहा है, जिससे निर्यात नियमों और बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। वहीं चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका AI क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।

चिप प्रतिबंध के बाद चीन का नया रास्ता

अमेरिका ने पिछले कुछ वर्षों में चीन को उन्नत AI चिप्स के निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में रिपोर्ट के मुताबिक चीन सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों के बावजूद बेहतर AI मॉडल तैयार करने के लिए मॉडल डिस्टिलेशन जैसी तकनीकों पर तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के साथ सुरक्षा और डेटा संरक्षण से जुड़े जोखिम भी मौजूद हैं।

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