मणिपुर में NRC की मांग को लेकर अमित शाह से मिले बीरेन सिंह, आर्थिक नाकेबंदी और सप्लाई संकट पर भी हुई चर्चा

इंफाल। लंबे समय से अशांत चल रहे मणिपुर में हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। इस बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य में जारी आर्थिक नाकेबंदी, जरूरी सामान की सप्लाई में रुकावट और जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) लागू करने की मांग को लेकर चर्चा की।
दिल्ली के दो दिवसीय दौरे के बाद इंफाल लौटे बीरेन सिंह ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री के सामने राज्य के लोगों की मांग रखी। उन्होंने कहा कि मणिपुर के लोग जनगणना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी मांग है कि पहले राज्य में NRC लागू किया जाए और उसके बाद जनगणना कराई जाए।
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आर्थिक नाकेबंदी और सप्लाई पर चिंता
बीरेन सिंह ने बताया कि उन्होंने अमित शाह को आर्थिक नाकेबंदी और जवाबी नाकेबंदी के कारण जरूरी सामान की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई प्रभावित होने की जानकारी दी। उनके मुताबिक, गृह मंत्री ने इन समस्याओं को जल्द हल करने का भरोसा दिया है।
उन्होंने कहा कि फरवरी 2023 में राज्य में जातीय हिंसा शुरू होने से पहले उनकी तत्कालीन सरकार ने NRC लागू करने की मांग उठाई थी। उनके अनुसार, गृह मंत्रालय और रजिस्ट्रार जनरल की ओर से उस समय बताया गया था कि राज्य सरकार की मांग पर विचार किया जा रहा है।
‘जनगणना के खिलाफ नहीं हैं लोग’
बीरेन सिंह ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री को स्पष्ट किया कि मणिपुर के लोग जनगणना का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि जनगणना से पहले NRC लागू किया जाए।
मणिपुर में इस मांग को लेकर कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। रविवार को इंफाल में जनगणना संचालन निदेशालय के बाहर छात्रों ने प्रदर्शन किया और जनगणना से पहले NRC लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
अवैध प्रवासियों की पहचान की मांग
इससे पहले 16 अगस्त की शाम इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट जिलों में सैकड़ों लोगों ने अवैध प्रवासियों की पहचान की मांग को लेकर मशाल रैली निकाली थी। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि राज्य में अवैध प्रवासियों की मौजूदगी से आबादी का संतुलन प्रभावित हुआ है।
बीरेन सिंह ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक राज्य में 926 ऐसे गांव हैं, जिन्हें अभी मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने इन गांवों को भी मान्यता देने की मांग गृह मंत्री के सामने रखी।
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। ऐसे में NRC, जनगणना और अवैध प्रवासियों की पहचान का मुद्दा राज्य की राजनीति में लगातार अहम बना हुआ है।



