नेपाल सैलाब में मिले शवों की कैसे होगी पहचान? DNA से फिंगरप्रिंट और डेंटल रिकॉर्ड तक, जानिए पूरी प्रक्रिया

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के लापता होने की खबरों के बीच अब शवों की पहचान बड़ी चुनौती बन गई है। तेज बहाव में बहने और कई दिनों तक पानी में रहने के कारण कई शवों की पहचान चेहरा देखकर करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में फॉरेंसिक साइंस और Disaster Victim Identification (DVI) प्रक्रिया की मदद ली जाती है।
सबसे पहले शव को दी जाती है यूनिक पहचान
किसी अज्ञात शव को तुरंत किसी व्यक्ति से जोड़ने के बजाय सबसे पहले उसे एक यूनिक पहचान नंबर दिया जाता है। शव की तस्वीर, बरामदगी की जगह, तारीख और परिस्थितियों को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके साथ कपड़े, जूते, मोबाइल, पर्स, घड़ी और आभूषण जैसी चीजों का भी विवरण दर्ज किया जाता है।
इन चीजों से शुरुआती सुराग मिल सकता है, लेकिन केवल कपड़ों या निजी सामान के आधार पर अंतिम पहचान नहीं मानी जाती।
फिंगरप्रिंट से हो सकती है तेज पहचान
अगर पानी और क्षति के बावजूद उंगलियों की त्वचा और संरचना सुरक्षित है, तो विशेषज्ञ फिंगरप्रिंट लेने की कोशिश करते हैं। इनका मिलान उपलब्ध सरकारी या अन्य रिकॉर्ड से किया जा सकता है।
हालांकि, लंबे समय तक पानी में रहने या शरीर के ज्यादा क्षतिग्रस्त होने पर फिंगरप्रिंट लेना मुश्किल हो सकता है।
दांतों से भी होती है शव की पहचान
शव की पहचान में डेंटल रिकॉर्ड काफी महत्वपूर्ण होते हैं। दांत शरीर के कई दूसरे हिस्सों की तुलना में लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं।
अगर किसी लापता व्यक्ति के पुराने डेंटल रिकॉर्ड, एक्स-रे, फिलिंग, क्राउन या दांतों से जुड़ी मेडिकल जानकारी उपलब्ध हो, तो विशेषज्ञ उसकी तुलना शव से कर सकते हैं। कई मामलों में इससे पहचान की पुष्टि करने में मदद मिलती है।
DNA टेस्ट सबसे भरोसेमंद तरीकों में शामिल
जब चेहरा पहचान में नहीं आता, फिंगरप्रिंट नहीं मिलते या डेंटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होते, तब DNA प्रोफाइलिंग बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
शव से DNA सैंपल लेकर उसकी तुलना लापता व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या बच्चों जैसे जैविक रिश्तेदारों के DNA से की जा सकती है। DNA मैच होने पर मृतक की पहचान की पुष्टि करने में मदद मिलती है।
DVI प्रक्रिया में कैसे होता है मिलान?
आपदा के दौरान एक तरफ लापता लोगों की जानकारी जुटाई जाती है—नाम, उम्र, आखिरी लोकेशन, मेडिकल और डेंटल रिकॉर्ड समेत। दूसरी तरफ मिले अज्ञात शवों की जानकारी दर्ज की जाती है।
इसके बाद दोनों तरह के डेटा का मिलान किया जाता है। फिंगरप्रिंट, DNA, डेंटल रिकॉर्ड, मेडिकल जानकारी और शरीर की अन्य विशेषताओं को मिलाकर संभावित पहचान तय की जाती है।
शरीर के निशान और मेडिकल इम्प्लांट भी मददगार
किसी व्यक्ति के शरीर पर मौजूद पुराने निशान, टैटू या अन्य विशिष्ट पहचान भी सुराग दे सकते हैं। इसके अलावा शरीर में मौजूद प्लेट, स्क्रू या अन्य मेडिकल इम्प्लांट की जानकारी भी पहचान में मदद कर सकती है, अगर उसका मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
पहचान की पुष्टि के बाद ही परिवार को सौंपा जाता है शव
भीषण आपदा के बाद शवों की पहचान में जल्दबाजी के बजाय वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाना जरूरी होता है। फिंगरप्रिंट, डेंटल रिकॉर्ड, DNA, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर पर्याप्त पुष्टि होने के बाद ही कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर शव परिवार को सौंपा जाता है।
नेपाल में जारी आपदा के बीच यही वैज्ञानिक प्रक्रिया उन परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी, जो अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।
How Will the Bodies Recovered from the Nepal Flood Be Identified? From DNA to Fingerprints and Dental Records, Know the Complete Process



