ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने एशिया से हटाया आखिरी एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन को मिला रणनीतिक मौका

ईरान और अमेरिका के बीच जारी लंबे युद्ध का असर अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका का एशिया में तैनात आखिरी एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज वॉशिंगटन अब इस क्षेत्र से रवाना हो रहा है। इसे मध्य पूर्व भेजा जा रहा है, जहां यह लंबे समय से तैनात USS अब्राहम लिंकन की जगह लेगा। इसके बाद कुछ समय के लिए पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का कोई एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात नहीं रहेगा।
USS अब्राहम लिंकन की तैनाती पहले मई में खत्म होने वाली थी, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के कारण इसे आगे बढ़ाया गया। जहाज अब 240 दिनों से ज्यादा समय से लगातार समुद्र में है। इतनी लंबी तैनाती से सैनिकों की थकान, मानसिक स्वास्थ्य और जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिकी सांसदों ने भी जहाज की स्थिति की समीक्षा और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।
चीन की सैन्य गतिविधियों पर बढ़ी नजर
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की एशिया से वापसी चीन के लिए रणनीतिक रूप से अहम हो सकती है। अमेरिका पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र को अपनी प्रमुख सैन्य प्राथमिकताओं में रखता है, लेकिन ईरान युद्ध के चलते उसका ध्यान एक बार फिर मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इससे जापान, फिलीपींस समेत अमेरिका के अन्य सहयोगियों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
चीन लंबे समय से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं में बड़ी बाधा मानता है। ताइवान को लेकर भी चीन और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है। हालांकि, केवल एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की वापसी को चीन की ओर से ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की सीधी वजह नहीं माना जा रहा है। इसके बावजूद बीजिंग इस स्थिति का इस्तेमाल दक्षिण चीन सागर और आसपास के इलाकों में अपनी सैन्य क्षमता प्रदर्शित करने के लिए कर सकता है।
चीन ने हाल के दिनों में इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक अभ्यास किया है और दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के पास भी सैन्य गतिविधियां की हैं। इस क्षेत्र पर चीन और फिलीपींस दोनों अपना दावा करते हैं। इसके अलावा चीन के एक मिसाइल विध्वंसक ने जापान के दक्षिणी द्वीप ओकिनोटोरि के पास लाइव-फायर अभ्यास किया था।
लंबी तैनाती से अमेरिकी नौसेना पर दबाव
अमेरिका के पास कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं और सामान्य परिस्थितियों में इनमें से दो से तीन एक समय में तैनात रहते हैं। लंबे समय तक लगातार अभियान चलने के कारण इन जहाजों की मरम्मत और रखरखाव की जरूरत भी बढ़ रही है। अमेरिका में ऐसे जहाजों की मरम्मत के लिए सीमित संख्या में शिपयार्ड उपलब्ध हैं, जिससे भविष्य में दबाव बढ़ने की आशंका है।
USS गेराल्ड आर. फोर्ड भी मई में करीब 11 महीने की तैनाती के बाद वापस लौटा था। यह वियतनाम युद्ध के बाद उसकी सबसे लंबी तैनाती बताई गई। इस दौरान जहाज ने ईरान के खिलाफ अभियान समेत कई सैन्य अभियानों में भूमिका निभाई। लंबे समय तक समुद्र में रहने और लगातार सैन्य गतिविधियों के कारण नौसैनिकों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ड्रोन और मिसाइल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे में अमेरिकी नौसेना छोटे जहाजों और पनडुब्बियों के इस्तेमाल के साथ बड़े कैरियर पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर भी विचार कर रही है।



